नितिन नामदेव, रायपुर। इतिहास को किताबों में पढ़ना एक बात है, लेकिन उसे 2600 साल पुराने सिक्कों के जरिए महसूस करना बिल्कुल अलग अनुभव है। छत्तीसगढ़ के रायपुर और भाटापारा निवासी प्रोफेसर एवं इतिहासकार डॉ. ऋषिराज पांडे ने देशभर में घूम-घूमकर इतिहास के ऐसे ही अनमोल दस्तावेजों को अपने संग्रह में संजोया है। उनके पास राजा-महाराजा, मुगल और दिल्ली सल्तनत से लेकर अकबर, ब्रिटिश शासन और आजादी के दौर तक के दुर्लभ सिक्के मौजूद हैं। सोने-चांदी की अशरफी और मोहरों समेत उनका यह संग्रह भारतीय इतिहास के करीब 2600 वर्षों की कहानी बयां करता है।

इतिहासकार डॉ. रिषीराज पांडे का कहना है कि पिछले कई वर्षों से देशभर में घूमकर अलग-अलग हिस्सों से उन्होंने इन सिक्कों को एकत्रित किया है, जो आज के समय में बेहद अमूल्य हैं।

उन्होंने लल्लूराम डॉट कॉम को जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने बहुत सारे ऐतिहासिक सिक्के एकत्रित किए हैं। इसके लिए उन्होंने कई नीलामियों में भी हिस्सा लिया है। उनके संग्रह में 26वीं शताब्दी के सिक्के, भारत का पहला एक रुपये का सिक्का, अंग्रेजों द्वारा चलाया गया ‘कोकरून’ नामक सिक्का, ब्रिटिश इंडिया के सिक्के और मुगल सल्तनत के सिक्के शामिल हैं।

डॉ. पांडे ने बताया कि इतिहास लेखन में सिक्के महत्वपूर्ण सामग्री होते हैं और उनकाविशेष महत्व होता है। ये अपरिवर्तनीय ऐतिहासिक प्रमाण होते हैं। इन सिक्कों के माध्यम से हम विभिन्न राजवंशों का निरूपण कर सकते हैं। इन सिक्कों का एकत्रित मैंने किया है।

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H