पटना। बिहार में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम करने और घायलों को ‘गोल्डन आवर’ में तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम उठाया है। राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर होने वाले गंभीर हादसों के मद्देनजर राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार ने एक नई और व्यापक योजना तैयार की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य राज्यभर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को उच्चस्तरीय ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित करना है, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण होने वाली जनहानि को रोका जा सके।
दो श्रेणियों में होगा अस्पतालों का चयन
इस योजना के तहत राज्य के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों को दो अलग-अलग श्रेणियों में अधिसूचित किया जाएगा। इन्हें प्रथम स्तर (Level-1) और द्वितीय स्तर (Level-2) के ट्रामा सेंटर का दर्जा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया को गति देने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने प्रदेशभर के कुल 29 सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
नोडल अधिकारी द्वारा जारी किए गए निर्देश
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (एचएसएस) सह सड़क सुरक्षा के नोडल पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार सिन्हा ने इस संबंध में सभी संबंधित मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के अधीक्षकों को आधिकारिक पत्र जारी किया है। जारी किए गए निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप ट्रामा केयर सुविधाओं के विकास के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। अस्पतालों को उनकी मौजूदा क्षमताओं और बुनियादी ढांचे के आधार पर ही इस सूची में शामिल किया जा रहा है।
ई-मेल के माध्यम से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
सभी चिन्हित अस्पतालों को यह निर्देश दिए गए थे कि वे अपने संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों, डॉक्टरों की संख्या और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी जानकारी निर्धारित प्रारूप में राज्य स्वास्थ्य समिति के एचएसएस सेल को ई-मेल के जरिए भेजें। इन सभी संस्थानों से प्राप्त आंकड़ों और उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा जल्द ही एक उच्चस्तरीय बैठक में की जाएगी, जिसके आधार पर अंतिम मुहर लगेगी।
जेएलएनएमसीएच भागलपुर समेत कई बड़े संस्थान शामिल
राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी की गई 29 प्रमुख अस्पतालों की सूची में भागलपुर का प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) भी प्रमुखता से शामिल है। इसके अलावा इस सूची में एम्स पटना, आईजीआईएमएस पटना, पीएमसीएच पटना, एनएमसीएच पटना, डीएमसीएच दरभंगा, एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर और एएनएमएमसीएच गया जैसे राज्य के शीर्ष चिकित्सा संस्थान भी शामिल हैं।
निजी मेडिकल कॉलेज भी इस दौड़ में शामिल
केवल सरकारी संस्थान ही नहीं, बल्कि राज्य के कई प्रतिष्ठित निजी मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को भी इस चयन प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। गंभीर रूप से घायल मरीजों को तुरंत आईसीयू, वेंटिलेटर और न्यूरो-सर्जरी जैसी एडवांस मेडिकल सुविधाएं मिलने से सड़क हादसों में होने वाली अकाल मौतों के आंकड़ों में उल्लेखनीय कमी आने की पूरी उम्मीद है।
संसाधनों के आधार पर तय होगा ट्रामा सेंटर का दर्जा
अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टरों, सर्जनों, कुशल पैरामेडिकल स्टाफ, आधुनिक सीटी स्कैन मशीनों, सुसज्जित ऑपरेशन थिएटर और आरक्षित बेड की उपलब्धता के आधार पर ही उन्हें लेवल-1 या लेवल-2 का दर्जा प्रदान किया जाएगा। इन ट्रामा सेंटरों के नेटवर्क को राष्ट्रीय राजमार्गों पर तैनात एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस सेवाओं से भी सीधे जोड़ा जाएगा, ताकि दुर्घटना की सूचना मिलते ही त्वरित मदद पहुंचाई जा सके।
भागलपुर और आसपास के जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
भागलपुर के जेएलएनएमसीएच में लेवल-1 या लेवल-2 का ट्रामा सेंटर स्थापित होने से पूर्वी बिहार, सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लाखों मरीजों को भारी राहत मिलेगी। अब गंभीर रूप से घायल मरीजों को इलाज के लिए पटना या पश्चिम बंगाल के बड़े शहरों की तरफ रुख नहीं करना पड़ेगा, जिससे समय पर सही इलाज मिलना सुनिश्चित हो सकेगा।


