पटना। ​बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में कृषि परिदृश्य को बदलने और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्ययोजना की घोषणा की है। गुरुवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब पारंपरिक रासायनिक खेती के स्थान पर जैविक और प्राकृतिक खेती को एक जन-आंदोलन बनाने की दिशा में अग्रसर है।

​बायोगैस और वर्मी कम्पोस्ट पर विशेष ध्यान

​मिट्टी की उर्वरता को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने पशुधन के सदुपयोग पर जोर दिया है। मंत्री ने घोषणा की कि आगामी एक वर्ष के भीतर राज्य में 100 बायोगैस प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु लागत का 50 प्रतिशत (अधिकतम ₹22,500) तक अनुदान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026-27 के लिए 7500 पक्का वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि किसान स्वयं खाद तैयार कर सकें।

​प्राकृतिक खेती के लिए नकद प्रोत्साहन

​राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत, वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार ने 5700 हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने का संकल्प लिया है। इस योजना से जुड़ने वाले किसानों को वित्तीय सहायता के रूप में ₹4,000 प्रति एकड़ की दर से अनुदान राशि सीधे प्रदान की जाएगी।

​किसान-वैज्ञानिक संवाद और नवाचार

​कृषि मंत्री ने कहा कि नवाचार के बिना कृषि का विकास संभव नहीं है। अब हर जिले में अनुभवी शोधकर्ताओं और किसानों के बीच सीधा संवाद आयोजित किया जाएगा। यह पहल जिला और राज्य दोनों स्तरों पर होगी, जिससे किसानों को विशेषज्ञों से तकनीकी परामर्श मिल सके और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो। उन्होंने युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया।

​स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा

​विजय कुमार सिन्हा ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से मानव की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) घट रही है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर रसायनों के बिना भी उच्च उत्पादकता प्राप्त की जा सकती है। जैविक खेती न केवल मानव स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करेगी, बल्कि पर्यावरण को दूषित होने से बचाकर मिट्टी की सेहत भी सुधारेगी।