कुंदन कुमार/ पटना। ​बिहार पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की वर्तमान स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) विधि-व्यवस्था, सुधांशु कुमार ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि राज्य सरकार अपराध को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।

​सीसीए (CCA) के तहत सख्त कार्रवाई

​कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई तेज कर दी है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक कुल 676 संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ सीसीए (Crime Control Act) के तहत प्रस्ताव तैयार किए गए हैं, जिनमें से 252 लोगों के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा आदेश पारित भी कर दिए गए हैं। यह कदम पेशेवर अपराधियों में डर पैदा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

​गिरफ्तारियों और सजा का ब्यौरा

​ADG ने जानकारी दी कि बिहार में गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त 33,000 से अधिक अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा है। न्यायालयों में चल रहे मुकदमों में भी तेजी आई है, जिसके परिणामस्वरूप हाल ही में गंभीर आपराधिक मामलों में दो अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, हर्ष फायरिंग करने और पुलिस बल पर हमला करने जैसे संवेदनशील मामलों में 1,100 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई है।

​मुख्यमंत्री आवास के पास शराब बरामदगी पर प्रतिक्रिया

​मुख्यमंत्री आवास के निकट शराब की बोतलें मिलने की घटना को लेकर पूछे गए सवाल पर सुधांशु कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस को जो भी शुरुआती जानकारियां मिली हैं, उनके आधार पर सघन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

​’पुलिस की कोई जाति नहीं होती’

​बिहार में पुलिसिया कार्रवाई को लेकर उठाए जा रहे जातीय आरोपों का खंडन करते हुए एडीजी ने दो टूक कहा कि पुलिस बल की कोई जाति नहीं होती है। पुलिस केवल कानून के दायरे में रहकर अपना काम करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस आत्मरक्षा में कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और अपराधियों के खिलाफ कानून सम्मत सख्त कदम उठाना पुलिस का कर्तव्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अपराधी पर कार्रवाई करते समय उसकी जाति नहीं, बल्कि उसका अपराध देखा जाता है।