Bihar news: ​पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक शातिर दंपती ने बिहार पुलिस के 27 जवानों और उनके परिजनों को अपना निशाना बनाकर करीब 6 करोड़ रुपये की ठगी की। आरोपितों ने फर्जी फाइनेंस कंपनी का जाल बिछाकर पुलिस महकमे में अपनी पैठ बनाई थी।

​फर्जी दफ्तर और ठगी का जाल

​आरोपितों की पहचान कदमकुआं के लोहानीपुर निवासी आशुतोष कुमार सिंह और उसकी पत्नी रितु कुमारी के रूप में हुई है। आशुतोष ने कोतवाली इलाके के डुमरांव काम्प्लेक्स में एक फर्जी फाइनेंस कंपनी का दफ्तर खोल रखा था। दंपती ने निवेश पर भारी मुनाफे का प्रलोभन देकर पुलिसकर्मियों का विश्वास जीता।

​कैसे शिकार बनते थे पुलिसकर्मी?

​ठगी का तरीका बेहद शातिर था। ये दंपती मुख्य रूप से पुलिसकर्मियों को फोन कर निवेश के नाम पर आकर्षक रिटर्न का झांसा देते थे। विश्वास जीतने के लिए, ये शुरुआती एक-दो महीने तक मोटा मुनाफा समय पर लौटाते थे। जब पीड़ित लालच में आकर बड़ी रकम निवेश कर देते या अपने अन्य सहयोगियों को जोड़ देते, तो दंपती दफ्तर बंद कर फोन बंद कर लेते थे।

​चेन सिस्टम का किया इस्तेमाल

​इस गिरोह ने ‘चेन सिस्टम’ का सहारा लिया। एक पुलिसकर्मी को झांसे में लेने के बाद उसे ही दूसरे साथी को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था। आराध्य पासवान, सौरभ और बरसा कुमारी जैसे कई पीड़ित हैं, जिन्होंने अपने पति की मेहनत की कमाई या कर्ज लेकर लाखों रुपये इस उम्मीद में गंवा दिए कि उन्हें हर महीने तय रिटर्न मिलेगा।

​पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

​मुनाफा मिलना बंद होने और दफ्तर पर ताला लटके देख पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ जिसके बाद उन्होंने कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। कोतवाली थानाध्यक्ष अजय कुमार के अनुसार तकनीकी अनुसंधान और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने आशुतोष और उसकी पत्नी को कदमकुआं से गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस दंपती के बैंक खातों और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। गिरफ्तारी की खबर के बाद से पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और थाने में शिकायत दर्ज कराने वालों का तांता लगा हुआ है। यह घटना पुलिस महकमे के भीतर सुरक्षा और वित्तीय निवेश के प्रति सतर्कता पर बड़े सवाल खड़े करती है।