वीरेंद्र कुमार/ नालंदा। बिहार की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगरी राजगीर एक बार फिर भक्ति के सागर में सराबोर हो चुकी है। आज यानी 17 मई से विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है, जो 15 जून तक चलेगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे एक महीने की अवधि में 33 कोटि देवी-देवता राजगीर में ही निवास करते हैं, जिससे इस पावन धरती का कण-कण अलौकिक और भक्तिमय हो जाता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन
इस ऐतिहासिक मेले की शुरुआत आज सुबह मुख्य द्वार सतधारा पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा फीता काटकर की जाएगी। उद्घाटन समारोह के दौरान देश के कोने-कोने से आए प्रतिष्ठित संत-महात्मा, कई कैबिनेट मंत्री, सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती और पारंपरिक ध्वजारोहण के साथ इस एक दिवसीय उल्लासपूर्ण मेले का विधिवत शिलान्यास होगा।
पावन कुंड और आस्था का वैश्विक केंद्र
राजगीर के 22 पवित्र कुंड और 52 धाराएं इस समय देश-विदेश के श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। विशेष रूप से प्रसिद्ध ब्रह्मकुंड में आस्था की डुबकी लगाने के लिए भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों से भी लाखों सनातन धर्मावलंबी पहुंच रहे हैं। पौराणिक मान्यता है कि मलमास के दौरान यहां स्नान करने से मनुष्यों के समस्त पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्रद्धालुओं के लिए हाईटेक और चाक-चौबंद व्यवस्थाएं
बिहार सरकार ने इस बार मेले को पूरी तरह हाईटेक और सुविधाजनक बनाया है। श्रद्धालुओं के रहने और भोजन के लिए 11 जर्मन हैंगर टेंट सिटी, VIP कैंप और 25 ‘दीदी की रसोई’ संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा 300 प्याऊ, 1000 आधुनिक शौचालय undersea और 25 चेंजिंग रूम तैयार किए गए हैं। चिकित्सा सेवाओं के लिए 8 अस्थायी अस्पताल, 18 मेडिकल कैंप और 16 एंबुलेंस मुस्तैद हैं। सुरक्षा के लिहाज से 950 दंडाधिकारी, 530 पुलिस अधिकारी, SDRF टीम और 550 HD कैमरे लगाए गए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए पहली बार ऑडियो-विजुअल कैमरों का इस्तेमाल हो रहा है।
कौओं से जुड़ा अद्भुत और रहस्यमयी प्रसंग
इस मेले से जुड़ी एक अत्यंत रहस्यमयी मान्यता यह है कि पूरे एक महीने तक राजगीर परिसर में एक भी कौआ दिखाई नहीं देता। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने मलमास में सभी देवी-देवताओं को तो आमंत्रित किया था, लेकिन कागभुशुण्डि जी को निमंत्रण नहीं मिल सका। इसी नाराजगी के कारण आज तक इस पावन अवधि में यहां कौए प्रवेश नहीं करते। वर्तमान में पूरा राजगीर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गुंजायमान है।

