कुंदन कुमार/ पटना। पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र ने शनिवार को अपने कार्यालय कक्ष में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में विशेष रूप से अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज (सीमांचल क्षेत्र) जिलों में चल रही सड़क एवं पुल निर्माण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। विभागीय अधिकारियों ने मंत्री को सभी जारी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।
लेट-लतीफी पर कड़ा रुख
योजनाओं में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि समयसीमा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो भी संवेदक (ठेकेदार) तय समय से पीछे चल रहे हैं, उन्हें तुरंत कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। इसके बावजूद अगर कार्य में तेजी नहीं आती है, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट या डिबार करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके साथ ही उन्होंने विभागीय इंजीनियरों को भी अपनी कार्यशैली में गंभीरता लाने और हर हाल में गुणवत्तापूर्ण काम समय पर पूरा कराने की हिदायत दी।
टेंडर से पहले प्री-कंस्ट्रक्शन कार्य पूरे करने का निर्देश
परियोजनाओं को भविष्य में लेटलतीफी से बचाने के लिए ई. शैलेन्द्र ने एक बड़ा नीतिगत निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना का टेंडर (निविदा) निकालने से पहले सभी ‘प्री-कन्स्ट्रक्शन’ काम अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। इसमें भूमि अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लीयरेंस, यूटिलिटी शिफ्टिंग और पर्यावरण क्लीयरेंस जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। मंत्री का मानना है कि इससे काम शुरू होने के बाद कोई रुकावट नहीं आएगी, जिससे सरकार के समय और राजस्व दोनों की भारी बचत होगी।
अंतर-विभागीय अड़चनों को दूर करने के लिए मंत्रियों और CM को पत्र
समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कई सड़कें और पुल इसलिए लंबित हैं क्योंकि ग्रामीण कार्य विभाग या जल संसाधन विभाग से समय पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं मिला है या सड़कों का ट्रांसफर नहीं हो पाया है। इस अंतर-विभागीय गतिरोध को सुलझाने के लिए मंत्री ने अपने स्तर से ग्रामीण कार्य मंत्री और जल संसाधन मंत्री को अनुरोध पत्र भेजने का फैसला किया है। साथ ही, वे इस पूरी वस्तुस्थिति से मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर अवगत कराएंगे ताकि शीर्ष स्तर से इसका समाधान हो सके।
नए प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग के विकल्पों पर मंथन
जनहित को सर्वोपरि रखते हुए मंत्री ने अधिकारियों को भविष्य की योजनाओं पर भी काम करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि नई सड़कों और पुलों की स्वीकृति के लिए फंडिंग के जितने भी उपलब्ध विकल्प (जैसे केंद्रीय फंड, लोन या राज्य बजट) हो सकते हैं, उन सभी पर विचार कर जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार किया जाए ताकि नई योजनाओं को धरातल पर उतारा जा सके।

