कुंदन कुमार/पटना। बिहार सरकार द्वारा स्टेट हाईवे (SH) और उन पर बने पुलों से टोल टैक्स वसूलने के निर्णय ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने इस फैसले को बिहार की जनता पर सीधा हमला करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

​जनता की जेब पर डाका

​कांग्रेस प्रवक्ता ने कड़े शब्दों में कहा कि बिहार सरकार का यह कदम विकास के नाम पर जनता का ‘खून चूसने’ की सोची-समझी योजना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां जनहित के बजाय आम नागरिकों को आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने वाली हैं। राजेश राठौड़ ने कहा यह फैसला पूरी तरह से जनविरोधी है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

​रोड टैक्स के बाद टोल का औचित्य क्या?

​राजेश राठौड़ ने सरकार से तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि जब एक वाहन मालिक गाड़ी खरीदते समय भारी-भरकम रोड टैक्स का भुगतान पहले ही कर चुका होता है तो फिर बार-बार टोल टैक्स किस बात का वसूला जा रहा है? उन्होंने इसे दोहरी मार बताते हुए कहा कि सरकार पहले से ही महंगाई की मार झेल रही आम जनता पर बोझ डालने का काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क पर चलने के लिए पहले ही सरकार को राजस्व दिया जा चुका है ऐसे में स्टेट हाईवे और पुलों पर टोल वसूलना अनुचित और तर्कहीन है।

​आंदोलन की चेतावनी

​कांग्रेस प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस तुगलकी फरमान को वापस नहीं लिया तो जनता सड़क पर उतरकर इसका पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी आम जनता के साथ खड़ी है और इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। राठौड़ ने सरकार को सलाह दी कि वह जनता को राहत देने के बजाय उन्हें परेशान करने वाली योजनाओं को तुरंत रद्द करे।
​यह मुद्दा आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ले सकता है क्योंकि टोल टैक्स की मार सीधे तौर पर हर वर्ग के वाहन मालिकों की जेब पर असर डालेगी। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार कांग्रेस और जनता के इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है।