बिहार में नए पहचान पत्र बनाने के अभियान को लेकर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और बिहार आपूर्ति सेवा संघ आमने-सामने आ गए हैं। बिना संसाधनों के असंभव लक्ष्य थोपने और अधिकारियों का वेतन काटने के विरोध में संघ ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
विरोध के मुख्य कारण और चरणबद्ध आंदोलन
बिहार में 11,04,425 नए पहचान पत्र जोड़ने के अभियान को लेकर गतिरोध उत्पन्न हो गया है। बिना कंप्यूटर, इंटरनेट, वाहन और बजटीय प्रावधान के जबरन असंभव लक्ष्य थोपने तथा एक कॉल रिसीव न होने पर अधिकारियों का वेतन काटने के विरोध में संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।
संघ के निर्णय के अनुसार, 20 से 26 अगस्त तक राज्य के सभी आपूर्ति अधिकारी और कर्मी काला बिल्ला लगाकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराएंगे। इस दौरान कार्य सामान्य रूप से जारी रहेगा, लेकिन यदि विभाग ने मांगों का समाधान नहीं निकाला, तो अधिकारी सामूहिक अवकाश और फिर पूर्ण हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे। संघ ने इस संबंध में विभाग के साथ-साथ मुख्य सचिव और विभागीय मंत्री को विस्तृत ज्ञापन और आंदोलन की पूर्व सूचना सौंप दी है।
गणितीय फॉर्मूले पर आधारित लक्ष्य पर आपत्ति
आपूर्ति सेवा संघ के अध्यक्ष श्रीराम मिश्रा ने बताया कि विभाग ने बिना किसी मैदानी सर्वे के सिर्फ गणितीय फॉर्मूले से 11 लाख नए पहचान पत्र का लक्ष्य तय कर दिया है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, एनएफएसए की अधिकतम 8.71 करोड़ की सीमा में से 8.24 करोड़ लाभुक पहले से आच्छादित हैं। शेष सीलिंग 46.93 लाख बनती है। इसी सीलिंग को 4.25 के औसत परिवार आकार से भाग देकर 11.04 लाख कार्ड का लक्ष्य निकाला गया है, जो कि पूरी तरह से 15 साल पुराने जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित है।
संसाधनों की कमी और अधिकारियों का उत्पीड़न
संघ का दावा है कि आपूर्ति कार्यालयों में न तो कंप्यूटर-स्कैनर हैं, न इंटरनेट और न ही विभागीय वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। प्रिंटआउट और जांच के लिए वाहन भाड़े का औसतन 250 से 300 रुपए प्रति कार्ड का खर्च अधिकारियों को अपने वेतन से देना पड़ रहा है।
इसके अलावा, 17 जुलाई को सीयूजी पर कॉल रिसीव न होने या जीपीएस लाइव लोकेशन न मिलने के आधार पर दर्जनों अधिकारियों का 1 दिन का वेतन काट लिया गया है, जिससे महकमे में भारी रोष व्याप्त है।

