पटना। बिहार में चर्चा का विषय बने बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। एजेंसी ने घोटाले के मुख्य आरोपी रिशुश्री के बेहद करीबी सहयोगी संतोष को पटना से गिरफ्तार कर लिया है। संतोष की गिरफ्तारी को जांच में अब तक का सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है।

​नेटवर्क का मुख्य संचालक था संतोष

​जांच में खुलासा हुआ है कि संतोष केवल रिशुश्री का सहयोगी ही नहीं, बल्कि उसके काले कारोबार का मुख्य स्तंभ था। वह रिशुश्री की कंपनी ‘मातृस्वा’ का निदेशक था और ‘रिलायबल’ नामक एक अन्य कंपनी भी उसी के नाम पर संचालित होती थी। दिलचस्प बात यह है कि रिशुश्री की पत्नी ऋतंभरा भी इन कंपनियों में निदेशक थीं। अधिकारियों का मानना है कि इन शेल कंपनियों के जरिए सरकारी टेंडरों में हेरफेर और नेटवर्किंग की जाती थी। मुख्य रूप से सुपौल से संचालित होने वाला यह नेटवर्क सरकारी विभागों से गोपनीय जानकारी जुटाकर अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाता था।

​’IAS भैया’ का राज खोलेगा पोल

​इस पूरे मामले में जांच की दिशा उस समय बदल गई जब रिशुश्री के मोबाइल की फोरेंसिक जांच में एक नंबर ‘IAS भैया’ के नाम से सेव मिला। यह सुराग अब जांच एजेंसियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। SVU अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इस नंबर के पीछे कौन सा प्रभावशाली अधिकारी है और टेंडर आवंटन में उसकी क्या भूमिका थी।

​ED की नजर और प्रशासनिक गाज

​टेंडर घोटाले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गया है। एजेंसी धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। अब तक मिले डिजिटल साक्ष्य रिशुश्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सांठगांठ की ओर इशारा कर रहे हैं।
​प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले की आंच कई बड़े अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। अनियमितताओं के आरोप में IAS योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा को पूर्व में ही निलंबित किया जा चुका है। संतोष से हो रही गहन पूछताछ के बाद अब कई अन्य वरिष्ठ IAS अधिकारियों पर भी निलंबन और कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
​एजेंसियों का कहना है कि संतोष के पास उन तमाम चेहरों की जानकारी है जो पर्दे के पीछे रहकर इस पूरे सिस्टम को चला रहे थे। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने और उच्च अधिकारियों से पूछताछ की प्रबल संभावना है।