पटना। बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) का बेसब्री से इंतजार कर रहे 15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। परीक्षा प्रक्रिया में हो रही निरंतर देरी और प्रशासनिक स्तर पर बदल रहे बयानों के कारण छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है। अभ्यर्थी शिक्षा विभाग की कार्यशैली को लेकर भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
छात्र नेता दिलीप कुमार का तीखा हमला
शिक्षक अभ्यर्थी संघ के प्रमुख चेहरा और छात्र नेता दिलीप कुमार ने राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिलीप कुमार ने सरकार पर छात्रों को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री ने पूर्व में सार्वजनिक रूप से यह दावा किया था कि 25 जुलाई तक TRE-4 का विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा।
हालांकि अब विभाग के रुख में बदलाव देखा जा रहा है जहां कहा जा रहा है कि 25 जुलाई तक केवल अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को भेजी जाएगी। छात्र नेता का कहना है कि बयानों में यह विरोधाभास लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
46 हजार पदों पर स्पष्टता की मांग
छात्रों की मुख्य मांग पदों की संख्या को लेकर है। पूर्व में सरकार ने लगभग 46 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था। दिलीप कुमार ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि सरकार अपने वादे से पीछे न हटे और किसी भी स्थिति में पदों की संख्या कम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जुलाई महीने के भीतर ही आधिकारिक विज्ञापन जारी किया जाए ताकि लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिल सके। यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रशासनिक समीक्षा और अनसुलझे सवाल
बीते 7 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में TRE-4 की तैयारियों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को 25 जुलाई तक BPSC को अधियाचना भेजने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था।
प्रशासनिक स्तर पर तो यह कदम उठाया गया है लेकिन विज्ञापन जारी करने की कोई ठोस तिथि तय नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों में असंतोष बरकरार है। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह छात्रों के इस आक्रोश को शांत करने के लिए कितनी जल्दी विज्ञापन जारी करती है।

