मद्रास हाई कोर्ट ने POCSO अधिनियम से जुड़े एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी नाबालिग लड़की द्वारा सीटी बजाने को नजरअंदाज करने के बाद उसका हाथ जबरन खींचना गंभीर और आपत्तिजनक कृत्य है। हालांकि, प्रथम दृष्टया इसे POCSO Act की धारा 8 के तहत ‘यौन हमला (Sexual Assault)’ नहीं माना जा सकता। अदालत ने संकेत दिया कि यह मामला धारा 11 के तहत ‘यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment)’ के दायरे में आ सकता है।
1 मार्च 2020 को हुई थी घटना
मामला 1 मार्च 2020 का है। आरोप के अनुसार, मंदाई उर्फ मनोगरन ने अपनी बालकनी से एक नाबालिग लड़की पर सीटी बजाई, जब वह अपनी चाची के घर जा रही थी। लड़की ने उसे नजरअंदाज किया तो आरोपी नीचे आया, उसका हाथ पकड़कर जबरन खींचा और उसकी ओर मुस्कुराया। घबराई लड़की वहां से भाग गई और घर पहुंचकर अपनी मां को पूरी घटना बताई। अगले दिन, 2 मार्च 2020 को उसकी मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
बचाव पक्ष और अभियोजन की दलीलें
विशेष POCSO अदालत ने 6 जून को आरोपी को दोषी ठहराते हुए 3 साल के कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट में अपील के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि हाथ खींचना अनुचित और दंडनीय हो सकता है, लेकिन इसे धारा 8 के तहत यौन हमला नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने कहा कि पीड़िता के बयान पुलिस, मजिस्ट्रेट और ट्रायल कोर्ट के सामने पूरी तरह सुसंगत रहे हैं।
हाई कोर्ट ने सजा और जुर्माना किया निलंबित
मद्रास हाई कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में आरोपी द्वारा सीटी बजाना, लड़की को पुकारना और उसका हाथ पकड़ना जैसी बातें सामने आई हैं। अदालत ने कहा कि इन तथ्यों पर कानून के तहत विस्तृत परीक्षण की आवश्यकता है कि क्या यह धारा 8 के बजाय धारा 11 के अंतर्गत आता है। इसी आधार पर कोर्ट ने अपील पर अंतिम फैसला आने तक आरोपी की जेल की सजा और जुर्माने के आदेश को निलंबित कर दिया।
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