Lalluram Desk. ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु की स्थिति का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है। यदि ग्रह अनुकूल हों तो जीवन में सफलता, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है। वहीं अगर ग्रहों की विपरीत दशा या दोष होने पर इंसान को मानसिक तनाव आर्थिक संकट और समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
अक्सर लोग ग्रहों को शांत करने और उनके बुरे प्रभावों से बचने के लिए महंगे अनुष्ठान रत्न धारण या जटिल पूजा-पाठ का सहारा लेते हैं। लेकिन शास्त्रों और प्राचीन मान्यताओं में कुछ ऐसे आसान और अचूक उपाय हैं, जिन्हें निष्ठापूर्वक करने से सभी नवग्रह शांत होते हैं।
यदि कोई व्यक्ति अपनी कुंडली में ग्रहों के दोष या जीवन में आ रही निरंतर रुकावटों से परेशान है, तो नवग्रहों की शांति और सर्व-बाधा मुक्ति तो बरगद के पेड़ के पत्तों और दही का यह विशेष प्रयोग किया जा सकता है। जब यह उपाय पूर्ण भक्ति भाव से किया जाता है, तो भगवान शंकर की कृपा से कुंडली के सभी अशुभ ग्रह शांत होते हैं। जीवन से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
उपाय की विधि और नियम
1. सबसे पहले बरगद के पेड़ से 5 स्वच्छ और अखंडित पत्ते तोड़ लें।
2. सनातन परंपरा में बरगद के वृक्ष को ‘अक्षय’ माना गया है और इसमें त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास माना जाता है।
3. इन पाचों पत्तों को इकठ्ठा करके उन पर मिट्टी बालू या राख की सहायता से एक छोटा शिवलिंग बनाए।
4. निर्मित शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक दही का तिलक लगाएं।शास्त्र में दही का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से माना गया है।जो मन की शांति और जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक है।
5. इसके पश्चात् इस प्रकार निर्मित शिवलिंग को किसी नजदीकी शंकर मंदिर में ले जाकर स्थापित करें या महादेव के मुख्य शिवलिंग पर चढ़ा दें।
यह उपाय किसी एक विशेष ग्रह के लिए नहीं बल्कि सभी नौ ग्रहों को शांत करने का एक समावेशी महा उपाय है। भगवान शंकर को ‘आशुतोष’ शीघ्र प्रसन्न होने वाले और ‘महेश्वर’ कहा जाता है। वे काल और ग्रहों के स्वामी हैं। बरगद का पेड़ अमरता और स्थिरता प्रदान करता है। वहीं दही शीतलता और सौम्यता का प्रतीक है।
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