CBI जांच की मांग दोहराई, कहा- NEET की तरह JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के साथ भी खड़े रहेंगे; सरकार से वार्ता को लेकर छात्रों ने रखीं शर्तें

रांची। दिल्ली में NEET आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बिरयानी बांटने के कारण चर्चा में आए मोहम्मद जुनैद अब झारखंड की राजधानी रांची पहुंच गए हैं। उन्होंने जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन को समर्थन देते हुए धरनास्थल पर आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की।

‘NEET की तरह JPSC छात्रों के साथ भी रहेंगे’

रांची पहुंचने के बाद मोहम्मद जुनैद ने कहा कि जिस तरह दिल्ली में NEET आंदोलन के दौरान छात्रों के लिए भोजन और अन्य व्यवस्थाएं कर उनका साथ दिया था, उसी तरह यहां भी आंदोलनकारियों के समर्थन में हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “हम अभी रांची पहुंचे हैं। पहले आंदोलन की स्थिति को समझेंगे और फिर उसी के अनुसार अपना सहयोग देंगे।”

CBI जांच की मांग

जुनैद ने JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए पूरे मामले की CBI जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगें जायज हैं और सरकार को जल्द सकारात्मक फैसला लेना चाहिए।

सरकार से वार्ता के लिए पांच सदस्यीय टीम

इधर, छात्र नेता राधे कुमार ने बताया कि सरकार से होने वाली वार्ता में आंदोलन की कोर कमेटी के पांच सदस्य शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मांगें प्रशासन के माध्यम से सरकार के सामने रखेंगे और सरकार के जवाब के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

‘बातचीत से सकारात्मक नतीजे की उम्मीद’

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का कहना है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार किन मांगों पर सहमत होती है। उनका कहना है कि उन्हें आज की बातचीत से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है, लेकिन फैसला सरकार के रुख पर निर्भर करेगा।

तीसरे दिन भी जारी भूख हड़ताल

भूख हड़ताल पर बैठी एक छात्रा ने बताया कि वह लगातार तीसरे दिन भी अन्न-जल त्याग कर आंदोलन में बैठी हैं। उन्होंने कहा कि लगातार उपवास के कारण उनकी तबीयत बिगड़ रही है और डॉक्टरों ने स्वास्थ्य जांच में ब्लड प्रेशर भी पहले से कम पाया है।

छात्रा ने कहा कि यदि सरकार परीक्षा रद्द करती है, तो दोबारा परीक्षा कराने की समय-सीमा भी तय करनी होगी। उनका कहना है कि छह महीने के भीतर नई परीक्षा आयोजित करने का स्पष्ट रोडमैप घोषित किया जाना चाहिए।

वार्ता के लिए छात्रों की दो शर्तें

छात्र नेता रवींद्र पासवान ने बताया कि प्रशासन के माध्यम से सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला है, जिसे छात्रों ने स्वीकार कर लिया है। हालांकि, छात्रों ने वार्ता के लिए दो अहम शर्तें रखी हैं—

0 बातचीत सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में हो।
0 बैठक के दौरान कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।

रवींद्र पासवान ने बताया कि प्रशासन ने छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम मांगे हैं, जिसके बाद बैठक का समय और स्थान तय किया जाएगा।

अब वार्ता पर टिकी निगाहें

एक ओर आंदोलन को देशभर से समर्थन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार और छात्रों के बीच प्रस्तावित वार्ता को लेकर उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। अब देखना होगा कि यह बातचीत आंदोलन का समाधान निकालती है या फिर छात्रों का संघर्ष आगे और तेज होता है।