हेमंत शर्मा, इंदौर। कांग्रेस को घेरने के लिए बयानबाजी का मंच तैयार था, निशाना भी तय था…लेकिन हमला करते-करते भाजपा के इंदौर शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा खुद इतिहास के सवाल में उलझ गए। कांग्रेस पर निशाना साधने के दौरान मिश्रा ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को देश का प्रथम प्रधानमंत्री बता दिया। जबकि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे और सरदार पटेल स्वतंत्र भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहे। यानी कांग्रेस को घेरने निकले भाजपा शहर अध्यक्ष का बयान ऐसा निकला कि सियासी तीर विपक्ष पर चलने से पहले ही अपने ही खेमे में लौट आया।

कांग्रेस पर हमला… लेकिन इतिहास की किताब ही खुल गई!

सुमित मिश्रा के बयान के सामने आते ही कांग्रेस को भाजपा पर पलटवार का बैठे-बिठाए मौका मिल गया। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि जो नेता देश के प्रथम प्रधानमंत्री का नाम तक सही नहीं बता पा रहे हैं, वे कांग्रेस के इतिहास और राजनीति पर सवाल कैसे उठा रहे हैं? कांग्रेस के AICC मीडिया कॉर्डिनेटर नीलाभ शुक्ला ने भी इस बयान पर चुटकी लेते हुए कहा कि अब भाजपा नेताओं के लिए राजनीतिक इतिहास की एकदिवसीय प्रशिक्षण क्लास लगाने की जरूरत है।यानी भाजपा का हमला कांग्रेस पर था, लेकिन कांग्रेस को जवाब देने के लिए अलग से मेहनत तक नहीं करनी पड़ी।

‘गुरु जैसे चेले’—कैलाश विजयवर्गीय की छाया में सुमित मिश्रा?

अब इस पूरे मामले में इंदौर की राजनीति का एक और दिलचस्प एंगल सामने आ रहा है।भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के बयान को लेकर कांग्रेस भले ही सवाल उठा रही हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या इंदौर भाजपा में बयानबाजी की वही शैली अब अगली पीढ़ी तक पहुंच रही है?क्योंकि भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी अपने बेबाक और कई बार विवादों में घिरने वाले बयानों के लिए सुर्खियों में रहे हैं।

हाल के वर्षों में उनके कई बयान राजनीतिक विवाद का कारण बने हैं। जून 2026 में इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान विजयवर्गीय के ‘काफिर’ वाले बयान पर भी जमकर राजनीतिक विवाद हुआ था। अब शहर अध्यक्ष का इतिहास से जुड़ा यह बयान सामने आया है तो कांग्रेस ने इसे ‘गुरु जैसा चेले’ वाले अंदाज में लेने का मौका पकड़ लिया है।

गुरु के ‘बयानवीर’ अंदाज की चर्चा, चेले ने इतिहास में मारी एंट्री!

कैलाश विजयवर्गीय की राजनीति में आक्रामक बयानबाजी उनकी पहचान का हिस्सा रही है। कभी मीडिया के सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया, कभी विपक्ष पर तंज और कभी ऐसे शब्द जो राजनीतिक विवाद का कारण बन जाएं—उनके बयान अक्सर सुर्खियों में रहे हैं। अब उसी इंदौर में भाजपा के शहर अध्यक्ष का बयान सामने आया है।

गुरु की पहचान—बयान से सुर्खियां। चेले की नई एंट्री—इतिहास से चूक!

राजनीति में भाषण के दौरान जुबान फिसलना नई बात नहीं है। लेकिन जब बात देश के प्रथम प्रधानमंत्री जैसे बुनियादी ऐतिहासिक तथ्य की हो, तो विपक्ष के लिए यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाता है।खासकर तब, जब बयान देने वाला व्यक्ति किसी आम कार्यकर्ता की बजाय पार्टी का शहर अध्यक्ष हो।यही वजह है कि सुमित मिश्रा का बयान अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा में है।

कांग्रेस का पलटवार—भाजपा नेताओं को पढ़ाएंगे इतिहास!

कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा है कि भाजपा नेताओं को पहले देश का राजनीतिक इतिहास पढ़ना चाहिए। नीलाभ शुक्ला ने इसी अंदाज में एकदिवसीय प्रशिक्षण आयोजन की बात कही है।यानी कांग्रेस अब भाजपा के इस बयान को सिर्फ एक गलती मानकर छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही, बल्कि इसे भाजपा के राजनीतिक ज्ञान पर हमला करने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।अब BJP के सामने बड़ा सवा- बयान था जुबान की फिसलन या ज्ञान की कमी?

बहरहाल, यह साफ नहीं है कि सुमित मिश्रा का बयान महज जुबान फिसलने का मामला था या उन्हें इतिहास के तथ्य को लेकर भ्रम हुआ। लेकिन राजनीतिक नुकसान हो चुका है।कांग्रेस को एक ऐसा मुद्दा मिल गया है जिसे वह भाजपा के खिलाफ लगातार उठा सकती है।और इंदौर की राजनीति में यह सवाल भी तैरने लगा है—कांग्रेस पर हमला करने निकले भाजपा नेता आखिर बार-बार अपने ही बयान से क्यों घिर जाते हैं? पहले कैलाश विजयवर्गीय के बयानों पर विवाद… अब शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का इतिहास वाला बयान…।

‘गुरु जैसा चेले’ वाला दौर चल रहा है?

फिलहाल सुमित मिश्रा के बयान ने कांग्रेस को हमला करने का मौका जरूर दे दिया है और भाजपा के सामने चुनौती है कि इतिहास की इस ‘गलती’ को सिर्फ जुबान की फिसलन बताकर मामला खत्म करती है या अपने शहर अध्यक्ष के बयान पर सफाई देती है।

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