अहमदाबाद/ दिल्ली में CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग का मुद्दा गरमाया हुआ है। कांग्रेस इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर रही है। इस बीच, गुजरात भाजपा के मीडिया विंग चीफ प्रशांत वाला ने 1974 के ऐतिहासिक ‘नवनिर्माण आंदोलन’ की याद दिलाते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। प्रशांत वाला ने कांग्रेस के रुख को दोहरा मापदंड करार देते हुए पूछा है कि 105 बेकसूर छात्रों पर गोलियां चलवाने वाली कांग्रेस ने आज तक इस काले अध्याय के लिए माफी क्यों नहीं मांगी?
स्वार्थ के लिए छात्रों को गुमराह कर रही है कांग्रेस
प्रशांत वाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्र सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन अपनी सुविधा के अनुसार इतिहास को भूल जाना राजनीतिक ईमानदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि आज जब कांग्रेस मानवाधिकारों और छात्र हितों की बात करती है, तो उसे पहले अपने अतीत का आत्ममंथन करना चाहिए। 1974 के आंदोलन में शहीद हुए विद्यार्थियों के परिवारों से न तो कांग्रेस ने और न ही गांधी परिवार ने कभी सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।
क्या था 1974 का ‘नवनिर्माण आंदोलन’?

दिसंबर 1973 में मोरबी और अहमदाबाद के एल.डी. इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में भोजन शुल्क वृद्धि के विरोध से शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही पूरे गुजरात में फैल गया। उस समय गुजरात में कांग्रेस के चिमनभाई पटेल मुख्यमंत्री थे और केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी।
भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ शुरू हुए इस जनआंदोलन को दबाने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाए थे।
1974 नवनिर्माण आंदोलन के प्रमुख आंकड़े:
- अवधि: 73 दिनों तक चला आंदोलन
- शहादत: पुलिस गोलीबारी में 105 विद्यार्थियों की मृत्यु
- गिरफ्तारियां: 8,053 लोग गिरफ्तार (184 पर मीसा/MISA लगा)
- बल प्रयोग: 1,654 बार लाठीचार्ज, 4,342 आंसू गैस के गोले और 1,405 राउंड गोलियां चलाई गईं
कांग्रेस से तीखे सवाल
प्रशांत वाला ने कहा कि अपार पीड़ा, यातनाओं और 105 विद्यार्थियों की शहादत के बाद अंततः चिमनभाई पटेल सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने कांग्रेस से सीधे सवाल दागे:
- क्या कांग्रेस ने नवनिर्माण आंदोलन के शहीदों के लिए कभी पश्चाताप किया?
- क्या कांग्रेस ने कभी सार्वजनिक रूप से माना कि छात्रों पर गोलियां चलाना दुर्भाग्यपूर्ण था?
- क्या उन पीड़ित परिवारों से कभी माफी मांगी गई?
वाला ने स्पष्ट किया कि यदि इन सभी प्रश्नों का उत्तर ‘नहीं’ है, तो फिर आज कांग्रेस को छात्र हित और लोकतंत्र पर नैतिकता का उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।
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