कुंदन कुमार, पटना। ​बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की एक तल्ख़ टिप्पणी के बाद मचे सियासी घमासान के बीच, बीजेपी विधान पार्षद (एमएलसी) देवेश कुमार ने सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की नेत्री रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर एनडीए सरकार और बीजेपी पर जोरदार हमला बोला है।

​कुर्बानी का बकरा और नैतिकता का ढोंग

​रोहिणी आचार्य ने अपने तीखे अंदाज में एनडीए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लिखा कि न्यायालय की तल्ख़ टिप्पणी से जब साख पर बट्टा लगा, तो आनन-फानन में ‘कुर्बानी का बकरा’ ढूंढ निकाला गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट से कानूनी फटकार मिलने के बाद बीजेपी और एनडीए के भीतर जो नैतिकता अचानक जागृत हुई है, वह वाकई काबिले-तारीफ़ है।

​कुर्सी बचाओ, गठबंधन चलाओ की नीति

​राजद नेत्री ने उपेंद्र कुशवाहा के सुपुत्र को मंत्रिमंडल में मलाईदार सीट पर बरकरार रखने के लिए बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार से इस्तीफा लिए जाने की बात कही। उन्होंने इसे विशुद्ध रूप से ‘कुर्सी बचाओ, गठबंधन चलाओ’ की नीति का एक नायाब उदाहरण करार दिया। रोहिणी के अनुसार, यह राजनीतिक पैंतरा केवल सत्ता के समीकरणों को साधने और अपने लोगों को बचाने के लिए चला गया है, जिसका जनता से कोई सरोकार नहीं है।