बेगूसराय। जिले में सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर तब बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता देवानंद कुशवाहा अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए। वीरपुर थाना क्षेत्र के गाड़ा चौक के पास आयोजित ‘पंचायत स्तर सहयोग शिविर’ के दौरान उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करने के लिए धरना देना उचित समझा।
क्या है पूरा मामला?
भाजपा प्रवक्ता देवानंद कुशवाहा ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनके घर तक जाने वाले मुख्य रास्ते पर कुछ दबंगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। उन्होंने दावा किया कि यह जमीन पीडब्ल्यूडी (PWD) की है, जिसे असामाजिक तत्वों ने अपनी बताकर न केवल अवरुद्ध कर दिया है, बल्कि उनसे रंगदारी की भी मांग की जा रही है।
यह विवाद लगभग एक वर्ष से चला आ रहा है। पूर्व में वीरपुर अंचल प्रशासन द्वारा जमीन की मापी कराकर रास्ता मुक्त कराया गया था, लेकिन दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने दोबारा उस रास्ते को बाधित कर दिया है।
प्रशासन की उदासीनता पर नाराजगी
धरने पर बैठे देवानंद कुशवाहा का आक्रोश इस बात को लेकर अधिक था कि बार-बार थाना, अंचल कार्यालय और जिला प्रशासन को लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यदि एक भाजपा प्रदेश प्रवक्ता की फरियाद प्रशासन नहीं सुन रहा है, तो आम जनता का क्या हाल होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।” उन्होंने साफ तौर पर प्रशासन और पुलिस पर घोर लापरवाही और दबंगों के साथ मिलीभगत का संगीन आरोप लगाया।
अधिकारियों का आश्वासन और धरना समाप्त
अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता के सड़क पर बैठने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वीरपुर थाना पुलिस और अंचल कार्यालय के अधिकारी (CI) आनन-फानन में मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने देवानंद कुशवाहा के साथ लगभग तीन घंटे तक लंबी वार्ता की। अंततः, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जल्द से जल्द मामले की जांच कर अवैध कब्जा हटवाने और रास्ता सुचारू रूप से खाली कराने के लिखित/मौखिक आश्वासन के बाद उन्होंने अपना धरना समाप्त किया।
यह घटना दर्शाती है कि प्रशासनिक उदासीनता कभी-कभी सत्तारूढ़ दल के नेताओं को भी असहज स्थिति में खड़ा कर देती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने वादे पर कितना खरा उतरता है।

