मुंबई नगर निगम ने शहर में कचरा रोकने वाले फ्लोटिंग बैरियर यानी ‘ट्रैश बूम’ के संचालन और रखरखाव के लिए 14 करोड़ रुपये का ठेका एक निजी कंपनी को दिया है. जिस पर विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं. खास बात यह है कि इसी कंपनी को बीएमसी पहले दो बार टेंडर के लिए अयोग्य ठहरा चुका था. हालांकि, कानूनी राय लेने के बाद महानगरपालिका ने वर्गो कंपनी को इस बार निविदा प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी.

मुंबई में मिठी नदी गाद प्रकरण में ब्लैक लिस्ट में डाली गई कंपनी को मुंबई महानगरपालिका ने ‘ट्रैश बूम’ के रखरखाव के लिए करीब 14 करोड़ का ठेका दिया है.

BMC ‘ट्रैश बूम’ के रखरखाव के लिए वैसी कंपनी को ठेका दिया है जिसपर पहले से ही काम में कथित अनियमितताओं और महानगरपालिका को 65 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान के मामले में कंपनी ब्लैक लिस्ट की सूची में है. इस मामले में कंपनी से जुड़े लोगों के खिलाफ पहले कार्रवाई भी की गई थी.

ट्रैश बूम पानी पर तैरने वाले ऐसे मजबूत अवरोधक होते हैं, जो प्लास्टिक या धातु जैसी टिकाऊ सामग्री से बनाए जाते हैं. इन्हें नालों और नहरों में बहकर आने वाले कचरे को रोकने के लिए पानी में बांधकर लगाया जाता है, ताकि कचरा आगे न फैल सके.

एक ब्लैक लिस्ट की सूची में शामिल कंपनी को ठेका दिए जाने के बाद से विपक्ष पूरी तरह हवी है और सत्तापक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

इस निविदा में कुल चार कंपनियों ने भाग लिया था. वर्गो कंपनी की बोली सबसे कम होने के कारण उसे दो साल के लिए यह ठेका दिया गया. जिसके बाद से सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, BMC का कहना है कि कानूनी राय लेने के बाद महानगरपालिका ने वर्गो कंपनी को इस बार निविदा प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी.

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