नालंदा/वीरेंद्र कुमार। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित होने वाली अभियोजन पदाधिकारी प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर नालंदा जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। परीक्षा के दौरान पारदर्शिता और कदाचार मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
12 केंद्रों पर होगी परीक्षा, कड़ी निगरानी का निर्देश
15 जुलाई को आयोजित होने वाली इस परीक्षा के लिए नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में कुल 12 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर कुल 6,744 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे। परीक्षा दो पालियों में संपन्न होगी। उप विकास आयुक्त रंजन कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित संयुक्त ब्रीफिंग में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा के दौरान सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी केंद्रों पर ऑब्जर्वर, स्टैटिक दंडाधिकारी और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अतिरिक्त जोनल मजिस्ट्रेट और उड़नदस्ता दल लगातार भ्रमणशील रहकर परीक्षा की निगरानी करेंगे।
प्रवेश के कड़े नियम और धारा 163 लागू
प्रशासन ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सख्त नियम जारी किए हैं। परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले तक ही केंद्र में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के साथ प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
सुरक्षा के व्यापक इंतजामों के तहत परीक्षा केंद्रों के 500 गज की परिधि में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू रहेगी। इस दौरान केंद्रों के आसपास भीड़ जमा करना या धारा का उल्लंघन करना दंडनीय अपराध होगा। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक केंद्र पर गतिविधियों की लगातार वीडियोग्राफी की जाए ताकि बाद में भी जांच की जा सके।
जिला स्तरीय कंट्रोल रूम सक्रिय
किसी भी प्रकार की सूचना या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तर पर एक समर्पित कंट्रोल रूम बनाया गया है। प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों की सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 18003456323 जारी किया है। जिला प्रशासन ने केंद्राधीक्षकों को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें। नालंदा प्रशासन का मुख्य उद्देश्य एक स्वच्छ और निष्पक्ष परीक्षा का संचालन करना है ताकि योग्य अभ्यर्थियों का चयन पारदर्शी तरीके से हो सके। प्रशासन की इन तैयारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नकल या कदाचार करने वालों पर प्रशासन की पैनी नजर रहेगी।

