लखनऊ. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए सहकारी खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि अगर किसान समूह बनाकर खेती करेंगे तो संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, उत्पादन लागत कम होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा.

मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सभागार में ‘विकसित भारत’ के तहत सतत कृषि विकास और ग्रामीण सशक्तीकरण की संभावनाओं, प्राथमिकताओं और तैयारियों पर आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने अपने विचार रखे.

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समूह बनाकर खेती करने से मिलेगा फायदा

ब्रजेश पाठक ने कहा कि किसानों को गांव-गांव सहकारी खेती के लाभों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब किसान सामूहिक रूप से उत्पादन, भंडारण और बिक्री करेंगे तो उन्हें कई फायदे मिलेंगे. उन्होंने बताया कि सहकारी खेती से किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और वे अपनी फसल का उचित मूल्य प्राप्त कर सकेंगे. सहकारी समितियां किसानों को कृषि संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ बाजार तक पहुंच बनाने में भी मददगार साबित हो सकती हैं.

भूजल संरक्षण के लिए आधुनिक सिंचाई तकनीक जरूरी

उपमुख्यमंत्री ने गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि खेती में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना समय की मांग है. उन्होंने कहा कि पानी का उपयोग फसल की जरूरत के अनुसार ही किया जाना चाहिए. उन्होंने किसानों से ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने की अपील की. ब्रजेश पाठक ने कहा कि इन तकनीकों से पानी की बचत के साथ-साथ सिंचाई की क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि भविष्य की खेती को टिकाऊ बनाने के लिए जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर ध्यान देना जरूरी है.

रासायनिक खाद और कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल की अपील

ब्रजेश पाठक ने किसानों से जरूरत से ज्यादा रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचने की अपील की. उन्होंने कहा कि अत्यधिक रसायनों के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और इसका असर पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे खेतों की उर्वरता बनी रहेगी और उत्पादन भी बेहतर होगा.

जैविक खाद और टिकाऊ खेती पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने कंपोस्ट, गोबर की खाद और अन्य जैविक खादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि पारंपरिक तरीकों और आधुनिक तकनीक के बेहतर मिश्रण से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां किसानों को बीज, खाद, तकनीकी जानकारी और बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

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ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है. सहकारी खेती, वैज्ञानिक तकनीक और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है.