Bundi Nikay Chunav 2026: राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में नाम वापसी के बाद प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो गई है। चुनाव चिह्न आवंटित होने के साथ ही सभी प्रत्याशी आमने-सामने हैं और प्रचार अभियान भी तेज हो गया है। इसी बीच शुक्रवार को बूंदी जिला कलेक्ट्रेट में चुनाव चिह्न को लेकर हंगामा हो गया। कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों ने उन्हें आवंटित किए गए चप्पल चुनाव चिह्न पर आपत्ति जताई। नाराज प्रत्याशियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी की और कलेक्टर चेंबर के बाहर पहुंच गए।

प्रत्याशियों का आरोप है कि उन्होंने चुनाव चिह्न के लिए अपनी पसंद के तीन चिह्नों का पैनल दिया था, लेकिन इनमें से एक भी चिह्न उन्हें आवंटित नहीं किया गया। उनका कहना था कि उनकी सहमति या पसंद जाने बिना चप्पल चुनाव चिह्न दे दिया गया।
कलेक्ट्रेट में नारेबाजी, पुलिस पहुंची
निर्दलीय प्रत्याशियों ने कहा कि चप्पल चुनाव चिह्न मिलने से क्षेत्र में उनकी छवि प्रभावित हो सकती है। इसी को लेकर उन्होंने जिला प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी दर्ज कराई।
मामला बढ़ने पर कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। प्रत्याशी नारेबाजी करते हुए कलेक्टर चेंबर के बाहर पहुंच गए। हंगामे की सूचना मिलने पर कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
बूंदी में 230 वार्डों की तस्वीर साफ
चुनाव चिह्न आवंटित होने के साथ बूंदी जिले में निकाय चुनाव की तस्वीर भी साफ हो गई है। जिले की 8 नगर निकायों के 230 वार्डों में 211 दावेदार चुनावी मैदान में हैं।
इनमें 19 वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति है, जबकि 14 वार्डों में सीधा मुकाबला है। बाकी वार्डों में मुकाबले की स्थिति अलग-अलग है।
बूंदी नगर परिषद में 91 निर्दलीय मैदान में
बूंदी नगर परिषद के 60 वार्डों में 91 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी से कई वार्डों में मुकाबला रोचक हो गया है।
कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी सीधे भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के सामने अपने-अपने वार्ड में वोटों को एकजुट रखने की चुनौती होगी।
अब प्रचार पर रहेगा पूरा फोकस
चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद प्रत्याशियों का पूरा फोकस अब प्रचार अभियान पर रहेगा। कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों के साथ निर्दलीय प्रत्याशी भी मतदाताओं के बीच पहुंचकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेंगे।
नाम वापसी के बाद जहां उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर सामने आ गई है, वहीं चुनाव चिह्न मिलने से प्रचार अभियान को भी गति मिलेगी। आने वाले दिनों में बूंदी के वार्डों में प्रचार तेज होने के साथ स्थानीय सियासत और गर्माने के आसार हैं।
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