बिहार के एक इलाके में स्थित भगवानपुर चौक की एक कैश लोडिंग एजेंसी से जुड़ी चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एजेंसी से 10 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम लेकर एक कर्मी अचानक गायब हो गया है। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिसके बाद सदर थाने में आधिकारिक तौर पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।
तीन साल के भरोसे का फायदा
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी कर्मी एक फाइनेंस कंपनी से जुड़ा हुआ है। वह पिछले लगभग तीन वर्षों से इस एजेंसी के माध्यम से कैश लेकर संबंधित बैंक खातों में राशि क्रेडिट करने का जिम्मा संभालता था। इतने लंबे समय के जुड़ाव के कारण एजेंसी को उस पर पूरा भरोसा था। इसी भरोसे के आधार पर उसे 10 लाख रुपये की नकद राशि सौंपी गई थी। हालांकि, रुपये हाथ में आते ही उसके हाव-भाव और व्यवहार में बदलाव साफ दिखने लगा था।
नेटवर्क और ओटीपी का खेल
रकम लेने के तुरंत बाद जब एजेंसी ने पैसे खाते में जमा करने की बात कही, तो आरोपी ने टालमटोल शुरू कर दिया। उसने सबसे पहले मोबाइल में नेटवर्क नहीं होने का बहाना बनाया। जब काफी समय बीत गया और राशि जमा नहीं हुई, तो उसने कार्यालय को यह कहकर बहलाना शुरू किया कि ओटीपी (OTP) आते ही वह तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देगा। इसके बाद भी जब खाते में पैसे नहीं पहुंचे, तो एजेंसी के अधिकारियों ने उसके नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ मिलने लगा।
पत्नी ने फोन उठाया पर नहीं दी जानकारी
लगातार संपर्क न होने पर जब एजेंसी के लोगों ने दूसरे माध्यमों से उसके नंबर पर घंटी बजाई, तो एक बार कॉल रिसीव हुई और उसकी पत्नी ने फोन उठाया। हालांकि, परिवार की ओर से भी आरोपी कर्मी के ठिकाने या इस रकम के संबंध में कोई भी संतोषजनक जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया गया। जब चारों तरफ से रास्ते बंद हो गए और आरोपी का कोई अता-पता नहीं चला, तो एजेंसी प्रबंधन ने पुलिस की शरण ली। फिलहाल, सदर थाने की पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और आरोपी की तलाश में जुट गई है।



