वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। वाहन बेचने के बाद अगर नाम ट्रांसफर नहीं हुआ है तो सावधान हो जाएं, क्योंकि मोटर दावा अधिकरण के एक फैसले ने वाहन बेचने के बाद भी पुराने वाहन मालिक की परेशानी बढ़ा दी है। दरअसल, वाहन बेचने के बाद नए वाहन मालिक के ड्राइवर से एक्सीडेंट हो गया, जिसमें एक कांस्टेबल की मौत हो गई है। वाहन बेचने के बाद नाम ट्रांसफर ना होने के कारण आरसी बुक में पुराने वाहन मालिक का ही नाम था।
अधिकरण की पीठासीन अधिकारी श्रुति दुबे ने मृतक कांस्टेबल की पत्नी को 63 लाख 93 हजार 992 रुपये की राशि का भुगतान करने का निर्देश पुराने वाहन मालिक को दिया है। इसमें से 20 प्रतिशत राशि मृतक कांस्टेबल के माता-पिता के बैंक अकाउंट में जमा कराने का निर्देश अधिकरण ने दिया है। अपने फैसले में अधिकरण ने कहा है कि वाहन बेचने के बाद नाम ट्रांसफर नहीं कराया है और आरसी बुक में पुराने स्वामी का नाम दर्ज है तो दुर्घटना के जिम्मेदार होने के साथ ही क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान की जिम्मेदारी भी उसे उठानी होगी। इस भार से वह मुक्त नहीं हो सकता।

2019 में बोलेरो की ठोकर से आरक्षक की हुई थी मौत
बता दें कि गतौरा निवासी आरक्षक प्रमोद वर्मा 27 अगस्त 2019 की शाम 7:20 बजे जांजगीर-चांपा जिले के पुटपुरा मुख्य द्वार के पास खड़ा था। इसी दौरान बोलेरो के चालक शैलेन्द्र पटेल ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उन्हें जोरदार ठोकर मार दी। घायल आरक्षक को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
काम नहीं आया नोटरी से कराए बिक्रीनामा
आरक्षक की पत्नी मनीषा वर्मा ने मुआवजे के लिए अधिकरण के समक्ष दावा प्रस्तुत किया। पुराने वाहन मालिक दिवाकर पाण्डेय ने अधिकरण को बताया कि सड़क दुर्घटना से बहुत पहले ही वाहन को बेच दिया था। नोटरी से बिक्रीनामा भी करा लिया है। उसने नोटरी से कराए गए बिक्रीनामा को अधिकरण के समक्ष पेश किया। अधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, चूंकि दुर्घटना के वक्त वाहन पुराने वाहन मालिक के नाम पर था, लिहाजा कानूनी रूप से दुर्घटना के लिए वही जिम्मेदार होगा।
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