पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा क्षेत्र में करीब तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म और मारपीट के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश गंगा पटेल की अदालत ने आरोपी वेदप्रकाश ध्रुव उर्फ पप्पू, उम्र 25 वर्ष, निवासी मस्जिदपारा वार्ड क्रमांक-14, छुरा को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
मामला 25 जून 2025 का है। विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी ने बताया, करीब तीन वर्ष चार माह की बच्ची आंगनबाड़ी में पढ़ती थी। घटना के दिन दोपहर के समय वह घर के सामने अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी उसे अपने साथ घर ले गया। इसकी जानकारी मिलने के बाद परिजन तत्काल आरोपी के घर पहुंचे। आरोप के अनुसार आरोपी ने अपने पूजा कमरे का दरवाजा बंद कर बच्ची के साथ मारपीट की और उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। शिकायत के आधार पर छुरा थाने में मामला दर्ज कर पुलिस ने विवेचना शुरू की।

विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। अभियोजन की ओर से कुल 11 गवाहों के बयान कराए गए। पीड़िता और गवाहों के कथनों के साथ घटना स्थल से मिले साक्ष्यों तथा चिकित्सकीय रिपोर्ट को भी न्यायालय के समक्ष रखा गया।
अदालत ने माना गंभीर प्रकृति का अपराध
विशेष न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी माना। अदालत ने अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अलग-अलग सजाएं सुनाईं। इनमें धारा 65(2) के तहत आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 64(2) के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास व 5 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 109 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास व 3 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 115(2) के तहत एक वर्ष का सश्रम कारावास व 2 हजार रुपये अर्थदंड शामिल है। नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों में कानून कठोर दंड का प्रावधान करता है। बीएनएस की धारा 65(2) गंभीर परिस्थितियों में नाबालिग से दुष्कर्म के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करती है।
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