CG News : अमित पाण्डेय, खैरागढ़. बख्शी मार्ग स्थित राधाकृष्ण मंदिर में रविवार सुबह रोज की तरह पूजा की तैयारी चल रही थी. अचानक मंदिर के ऊपरी छज्जे पर बैठी दो चमकती आंखों पर पुजारी की नजर पड़ी. पहले लोगों को लगा कोई सामान्य जानवर होगा, लेकिन करीब से देखने पर मामला अलग निकला. मंदिर के भीतर एक पाम सिवेट बैठा था. कुछ ही मिनटों में मंदिर परिसर में भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में वन्यजीव घुसने की खबर फैल गई. मंदिर के कोने में दुबका यह जीव लगातार लोगों की हलचल देख रहा था. स्थानीय लोग इसे पहले “कबरबिज्जू” समझ रहे थे, लेकिन बाद में इसकी पहचान पाम सिवेट के रूप में हुई. सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित पकड़ लिया गया. बाद में उसे शहर से दूर वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया.

आखिर शहर तक क्यों पहुंच रहा है पाम सिवेट?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार पाम सिवेट का इस तरह शहर में दिखाई देना सामान्य घटना नहीं मानी जाती, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मध्य भारत के कई शहरों और कस्बों में ऐसे मामले तेजी से बढ़े हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह जंगलों का सिकुड़ना और मानव बस्तियों का तेजी से फैलना माना जा रहा है. खैरागढ़ के आसपास फैले खेत, छोटे जंगल, नाले और पेड़ों की पट्टियां इन वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक कॉरिडोर का काम करती हैं. रात के समय भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में ये जीव शहर की सीमाओं तक पहुंच जाते हैं. पुराने मंदिर, बंद मकान और कम आवाजाही वाले भवन इन्हें छिपने के लिए सुरक्षित जगह लगते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि पाम सिवेट बेहद सतर्क और निशाचर जीव है. दिन में यह सामान्यतः छिपकर रहता है और रात में भोजन की तलाश में निकलता है. फल, छोटे पक्षी, कीड़े-मकोड़े और खाने की गंध इसे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर खींच लाती है.

दिखने में शांत, लेकिन वन्य जीवन का अहम हिस्सा
पाम सिवेट का वैज्ञानिक नाम Paradoxurus hermaphroditus है. यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला दुर्लभ स्तनधारी जीव है. इसकी बड़ी आंखें, लंबी पूंछ और पेड़ों पर तेजी से चढ़ने की क्षमता इसे अलग पहचान देती है. वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि पाम सिवेट जंगलों के पारिस्थितिक संतुलन में अहम भूमिका निभाता है. यह फलों के बीज फैलाने में मदद करता है, जिससे वनस्पतियों का प्राकृतिक विस्तार होता है. यही वजह है कि इसे “फॉरेस्ट गार्डनर” यानी जंगल का प्राकृतिक बीज वाहक भी कहा जाता है.
लोगों की भीड़ बनी सबसे बड़ी चुनौती
मंदिर में वन्यजीव घुसने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए. भीड़ और शोरगुल के कारण पाम सिवेट काफी देर तक सहमा रहा. वन विभाग के कर्मचारियों ने लोगों को दूर हटाकर रेस्क्यू अभियान चलाया. विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे वन्यजीव आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते, लेकिन खुद को घिरा महसूस करने पर आक्रामक हो सकते हैं. खैरागढ़ डीएफओ पंकज राजपूत ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे पकड़ने, भगाने या घेरने की कोशिश न करें. तुरंत विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है. खैरागढ़ में पाम सिवेट की यह मौजूदगी केवल एक रेस्क्यू की घटना नहीं, बल्कि बदलते पर्यावरण और सिमटते जंगलों का संकेत भी मानी जा रही है.

