आशुतोष तिवारी, बस्तर। जगदलपुर में लोक निर्माण विभाग यानी PWD की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे से जुड़े निर्माण कार्यों का है, जहां आरोप लग रहे हैं कि जिन कामों के लिए अब टेंडर निकाला गया है वे निर्माण कार्य पहले ही पूरे कराए जा चुके थे। ऐसे में विभाग की निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

PWD उत्तर बस्तर संभाग क्रमांक-1 जगदलपुर द्वारा जारी निविदा आमंत्रण सूचना क्रमांक 2341/NIT-4/2026-2027 दिनांक 17 मई 2026 के मुताबिक, निविदा फॉर्म प्राप्त करने की अंतिम तिथि 25 मई 2026 शाम 5:30 बजे तक निर्धारित की गई थी। ठेकेदारों द्वारा निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 28 मई 2026 शाम 5:30 बजे तक रखी गई, जबकि निविदा खोलने की तिथि 29 मई 2026 सुबह 11:30 बजे तय की गई है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन कार्यों के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वे काम जमीनी स्तर पर पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। यही वजह है कि अब पूरे मामले को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश है।


गृहमंत्री अमित शाह के दौरे से जुड़ा है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 18 मई के बस्तर दौरे को लेकर नेतानार सीआरपीएफ कैंप के पास हेलीपैड निर्माण का कार्य कराया गया था। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक यह काम गृहमंत्री के दौरे से करीब चार दिन पहले ही शुरू हो चुका था। यानी जिस कार्य के लिए 17 मई को निविदा जारी की गई, उसका निर्माण कार्य उससे पहले ही जमीन पर शुरू हो चुका था। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि जब काम पहले से चल रहा था तो फिर निविदा प्रक्रिया बाद में क्यों शुरू की गई?

बादल परिसर के रिनोवेशन पर भी उठ रहे सवाल
निविदा में बादल सांस्कृतिक परिसर के भवनों और परिसर के रिनोवेशन कार्य का भी उल्लेख किया गया है। यही वह परिसर है, जहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सल प्रभावित राज्यों के सुरक्षा बलों के जवानों का सम्मान किया था और शहीद जवानों के परिजनों से संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, लेकिन आरोप है कि यहां भी मरम्मत और रिनोवेशन का कार्य पहले ही पूरा कराया जा चुका था और बाद में उसके लिए निविदा जारी की गई। यदि ऐसा है तो यह पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सीमित ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की चर्चा तेज
पूरे मामले को लेकर यह चर्चा भी तेज है कि निविदा प्रक्रिया में सभी योग्य ठेकेदारों को समान अवसर नहीं दिया गया। ठेकेदारों द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभाग के कुछ पसंदीदा ठेकेदारों को बिना निविदा फॉर्म के काम दे दिया गया और उन्हीं के जरिए काम पूरा भी करा लिया गया। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल सरकारी नियमों पर सवाल खड़े करता है बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर संदेह पैदा करता है।
सवाल पूछने पर अधिकारी ने काट दिया फोन
जब इस पूरे मामले को लेकर लल्लूराम डॉट कॉम के संवाददाता ने PWD अधिकारी राजीव बतरा से पक्ष जानने की कोशिश की तो उन्होंने कथित तौर पर यह कहते हुए फोन काट दिया कि उनका रिटायरमेंट है और उन्हें परेशान न किया जाए। अधिकारी की यह प्रतिक्रिया अब पूरे मामले में और भी सवाल खड़े कर रही है।
नियमों पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी निर्माण कार्य से पहले निविदा प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होता है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सभी पात्र ठेकेदारों को बराबरी का अवसर मिल सके, लेकिन यदि पहले काम करा लिया जाए और बाद में टेंडर जारी हो तो यह पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला देता है। फिलहाल इस मामले ने बस्तर में PWD की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि विभाग इन आरोपों पर क्या सफाई देता है और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है या फिर यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाएगा।
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