चंडीगढ़। फ्रांस की राजधानी पेरिस में 25 जून को प्रस्तावित चंडीगढ़ की विरासत से जुड़े फर्नीचर की नीलामी को लेकर अब पंजाब ने आपत्ति की है। इस विषय को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन सक्रिय हो गया है। प्रशासन ने विदेश मंत्रालय (एमईए) से तत्काल हस्तक्षेप कर नीलामी रुकवाने और संबंधित विरासत वस्तुओं को भारत वापस लाने की मांग की है।
ले कोर्बुजिए की मूल परिकल्पना है फर्नीचर
प्रशासन ने कहा कि यह फर्नीचर चंडीगढ़ की आधुनिक वास्तु विरासत और प्रसिद्ध वास्तुकार ले कोर्बुजिए की मूल परिकल्पना का अभिन्न हिस्सा है। चंडीगढ़ का कैपिटल कॉम्प्लेक्स यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है, इसलिए इससे जुड़ी मूल वस्तुओं का संरक्षण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय है।
पत्र में दिया अहम तर्क प्रशासन ने पत्र में आशंका जताई है कि विदेशी नीलामी बाजार में ऐसे फर्नीचर का पहुंचना चोरी, अवैध रूप से हटाने, अनधिकृत बिक्री और विरासत संपत्ति के गैरकानूनी निर्यात की ओर संकेत करता है। पत्र में यह भी लिखा है कि यदि नीलामी हुई तो चंडीगढ़ की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी धरोहर हमेशा के लिए देश से बाहर जा सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने 23 जून को भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जांच में फर्नीचर की कथित चोरी, अवैध निर्यात, बिक्री और तस्करी के पहलुओं को खंगाला जा रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास और संबंधित फ्रांसीसी अधिकारियों के माध्यम से तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करे। प्रशासन ने नीलामी स्थगित कराने, जांच पूरी होने तक फर्नीचर को सुरक्षित रखने, स्वामित्व और रिकॉर्ड की पुष्टि करने, वस्तुओं की बरामदगी और भारत वापसी सुनिश्चित करने तथा भविष्य में चंडीगढ़ की विरासत से जुड़ी वस्तुओं की अवैध बिक्री रोकने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
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