हांसी के चनैत गांव में दो महीने से जारी पानी आंदोलन के बीच ग्रामीणों ने सोमेश शर्मा की गिरफ्तारी और एनएचएआई परमिशन को लेकर सरकार से दो तीखे सवाल पूछे हैं।
हांसी। पानी की मांग को लेकर पिछले करीब दो महीने से आंदोलन कर रहे चनैत गांव के ग्रामीणों ने अब सरकार के सामने दो ऐसे सवाल रख दिए हैं, जिनका जवाब देना सरकार के लिए आसान नहीं माना जा रहा। ग्रामीणों का दावा है कि यदि इन दोनों सवालों के जवाब सार्वजनिक हो गए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी और सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होंगे।
धरना दे रहे ग्रामीणों ने पहली मांग करते हुए कहा कि टी-कनेक्शन (T-Point) लगाए जाने से दो दिन पहले और दो दिन बाद तक सोमेश शर्मा की मोबाइल कॉल डिटेल सार्वजनिक की जाए। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि उस दौरान उनकी किन-किन लोगों से बातचीत हुई और पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही। उनका कहना है कि यदि सरकार निष्पक्ष है तो कॉल डिटेल सार्वजनिक करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।
दूसरा बड़ा सवाल ग्रामीणों ने NHAI की अनुमति को लेकर उठाया है। उनका कहना है कि सरकार फिलहाल यह कहकर पाइपलाइन का कार्य रोक रही है कि NHAI से अनुमति नहीं मिली। ऐसे में सवाल यह है कि जब अनुमति ही नहीं थी तो संबंधित विभाग ने पाइपलाइन का टेंडर किस आधार पर जारी कर दिया। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, इसका जवाब सरकार सार्वजनिक करे।
ग्रामीणों का कहना है कि ये दोनों सवाल बेहद सीधे और सरल हैं, लेकिन सरकार अब तक इन पर चुप्पी साधे हुए है। उनका दावा है कि यदि सरकार पारदर्शी है तो उसे इन सवालों के जवाब देने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
इसी बीच आंदोलन से जुड़ा एक और घटनाक्रम सामने आया है। हाल ही में चनैत गांव में चल रहे धरने के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे बुजुर्गों की हालत बिगड़ने पर सोमेश शर्मा ने अधिकारियों से बातचीत कर पाइपलाइन में टी-कनेक्शन लगवाकर अनशन समाप्त करवाया था। इसके बाद अब पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी पानी की मांग पूरी नहीं होती और सरकार उनके उठाए सवालों का जवाब नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन आरोपों और सवालों पर क्या जवाब देती है।

