चनैत गांव के पेयजल आंदोलन ने अब सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ग्रामीणों ने भाखड़ा पाइपलाइन से टी-जॉइंट देने के लिए 14 जुलाई तक का समय दिया है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने पहुंचेंगे। उससे पहले हांसी क्षेत्र के चनैत (चनोट) गांव का पेयजल आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। करीब दो महीने से धरने पर बैठे ग्रामीणों, खाप पंचायतों और किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को 14 जुलाई तक का अल्टीमेटम देते हुए साफ कर दिया है कि यदि गांव को भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन से टी (T) जॉइंट नहीं दिया गया तो 17 जुलाई को बड़ी संख्या में जींद पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपनी फरियाद रखेंगे।

यह आंदोलन 16 मई से लगातार जारी है और अब 50 दिन से अधिक का समय पार कर चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव से भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन गुजर रही है, लेकिन इसके बावजूद गांव को उसका लाभ नहीं मिल रहा। उनकी मांग है कि इसी पाइपलाइन से टी-जॉइंट देकर गांव के जलघर तक पेयजल पहुंचाया जाए, ताकि वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

सरकार के प्रस्ताव पर नहीं बनी सहमति

प्रशासन और सरकार का कहना है कि गांव को दूसरी व्यवस्था के तहत नहर आधारित पाइपलाइन से पानी उपलब्ध कराया जा सकता है, लेकिन ग्रामीण इस विकल्प को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब भाखड़ा की पाइपलाइन गांव से होकर गुजर रही है तो अलग व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च करने का कोई औचित्य नहीं है। ग्रामीण केवल टी-जॉइंट से ही पानी लेने की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रशासन का तर्क है कि संबंधित पाइपलाइन शहरी क्षेत्र के लिए AMRUT योजना के तहत बिछाई जा रही है।

आंदोलन को मिल रहा खापों और किसान संगठनों का साथ

समय के साथ यह आंदोलन केवल चनैत गांव तक सीमित नहीं रहा। आसपास की खाप पंचायतें, किसान संगठन और सामाजिक संस्थाएं भी खुलकर समर्थन में उतर आई हैं। हाल ही में हुई महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि 14 जुलाई तक सरकार ने टी-जॉइंट की मांग नहीं मानी तो 17 जुलाई को प्रधानमंत्री की जींद रैली में पहुंचकर सीधे उनके समक्ष यह मुद्दा उठाया जाएगा।

राजनीतिक रंग भी पकड़ रहा आंदोलन

लंबा खिंचता यह आंदोलन अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। विभिन्न विपक्षी दलों के नेता लगातार धरना स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों के समर्थन का दावा कर रहे हैं और राज्य सरकार पर ग्रामीणों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं। सत्तापक्ष इसे प्रशासनिक और तकनीकी विषय बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की संवेदनहीनता का मुद्दा बनाकर घेरने में जुटा है। ऐसे में पेयजल का स्थानीय मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति का भी हिस्सा बनता जा रहा है।

अब 14 जुलाई पर टिकी निगाहें

ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि 14 जुलाई तक यदि उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि 17 जुलाई को जींद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में पहुंचकर अपनी बात सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचाई जाएगी। ऐसे में प्रधानमंत्री के दौरे से पहले चनैत का यह पेयजल आंदोलन सरकार और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।