रायपुर। छत्तीसगढ़ आज विकास की वर्तमान तस्वीर को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत नींव तैयार कर रहा है। उम्मीद की जा रही है इस नींव पर ही वर्ष 2047 का विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ खड़ा होगा। छत्तीसगढ़ में विष्णु भैया के नेतृत्व में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के माध्यम से विकास को एक दीर्घकालिक दृष्टि प्रदान की है। उनका यह विजन योजनाओं और आंकड़ों से परे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प है।
इस विकास यात्रा की सबसे उल्लेखनीय पहल है GYAN ( ज्ञान)। GYAN पढ़ाई-लिखाई के अलावा विकास के चार महत्वपूर्ण आधारों का भी प्रतिनिधित्व करता है जिसमें G यानी गरीब, Y यानी युवा, A यानी अन्नदाता और N जो नारी का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह वही चार वर्ग हैं जिनकी मज़बूती से समाज और राष्ट्र मज़बूत होता है, यह वही वर्ग है जिसके सशक्तिकरण से विकास की यात्रा जन-जन तक पहुंचती है।
GYAN मॉडल में निहित है विकास की सम्पूर्ण तस्वीर
विष्णु भैया की अगुवाई में विकास की अवधारणा का केंद्र सड़क, भवन, उद्योग या अधोसंरचना नहीं बल्कि मनुष्य है। राज्य के मुख्यमंत्री ने गरीबों के जीवन में सम्मान, ज़रूरतमंद को अवसर, युवा के हाथ में कौशल और रोजगार, अन्नदाता की मेहनत को धन और मान और नारी को आत्मनिर्भरता देना ही समावेशी विकास की वास्तविक पहचान बताई है। GYAN मॉडल में समाज के प्रत्येक महत्वपूर्ण वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है है। युवा वर्ग इस पूरे मॉडल की वह शक्ति हैं जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था, तकनीक, उद्योग, शिक्षा और नवाचार को नई दिशा दे सकते हैं।

युवा शक्ति बनने जा रही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत
किसी भी विकसित राज्य की असली पूंजी उसकी सक्रिय युवा आबादी होती हैं। यदि इन युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल, तकनीकी दक्षता और रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलें तो यही युवा विकास के सबसे बड़े शक्तिशाली इंजन बन सकते हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जन-जन के विष्णु भैया की सोच इसी दिशा में आगे बढ़ती दिखाई देती है। राज्य में युवाओं को पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़ा कर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीक, नवाचार और उद्योग की बदलती जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में पूरे दावे के साथ यह कहा जा रहा है कि आने वाला समय ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का है। आज का विद्यार्थी नौकरी तलाशने वाला युवक नहीं बल्कि नौकरी देने वाला उद्यमी बनने की ओर अग्रसर है। तकनीक विकसित करने वाले और दुनिया के बाज़ार में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले कुशल मानव संसाधन बन सकते हैं।
उच्च शिक्षा में मिशन मोड की सोच
युवाओं के भविष्य को मज़बूत बनाने के लिए उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इसी लक्ष्य के साथ प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग मिशन मोड पर काम कर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से उच्च शिक्षा को महज़ डिग्री प्राप्त करने का ज़रिया न बनाकर गुणवत्तापूर्ण, व्यावसायिक और रोजगारोन्मुख बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका प्रमाण सकल नामांकन अनुपात यानी GER में दिखाई देता है। वर्ष 2021-22 में प्रदेश का GER 19.6 प्रतिशत था जो बढ़कर आज 27.5 प्रतिशत हो गया है। सरकार का उद्देश्य वर्ष 2035 तक इसे 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है।

इस बड़े आँकड़ों के पीछे हजारों युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे खुलने की संभावना छिपी है। जितने ज़्यादा युवा उच्च शिक्षा से जुड़ेंगे उतने ही अधिक युवा ज्ञान, कौशल और अवसरों से जुड़ पाएँगे और इससे ही तैयार होगी विकसित छत्तीसगढ़ की मानव पूंजी।
हर जिले में स्थापित किया जा रहा है सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
विष्णु भैया का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में सर्वसुविधायुक्त ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ महाविद्यालय स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की यह पहल क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। जब छोटे शहरों और जिलों के विद्यार्थियों को स्थानीय तौर पर ही बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी तो शैक्षणिक प्रतिभाओं को अवसर की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।बस्तर जैसे सुदूर क्षेत्रों के विकास को भी इस सोंच से नई दिशा मिल सकती है। शिक्षा के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को भी मुख्यधारा के अवसरों से जोड़ना शैक्षणिक सुधार के साथ ही सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन भी है।

डिग्री के साथ शोध और नवाचार पर जोर
प्रदेश आशान्वित है कि 2047 का छत्तीसगढ़ शिक्षित युवाओं के साथ ज्ञान और नवाचार का राज्य बनेगा इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए ‘राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना’ की परिकल्पना की गई है। शोध की संस्कृति विकसित होने से विद्यार्थी जानकारी भी ग्रहण करेंगे और समस्याओं के नए समाधान खोजने वाले भी बनेंगे। कृषि, खनन, वन, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यावरण, AI और स्थानीय अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ की अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप समधान ढूँढने में सक्षम होगा। आधुनिक वैज्ञानिकों के द्वारा ज्ञान के साथ भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को भी पाठ्यक्रमों में स्थान देने का प्रयास किया जा रहा है जिसे शिक्षा को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम कही जा सकती है।
NAAC मूल्यांकन बन रही गुणवत्ता की नई कसौटी
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता संस्थानों की संख्या पर नही उनकी गुणवत्ता से तय होती है। इसके लिए NAAC मूल्यांकन पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के 343 शासकीय महाविद्यालयों में से NAAC मूल्यांकन के लिए पात्र 254 महाविद्यालयों में से 200 का मूल्यांकन किया जा चुका है। इसी तरह प्रदेश के नौ विश्वविद्यालयों में से पांच विश्वविद्यालयों का NAAC मूल्यांकन किया जा चुका है। इस प्रक्रिया से संस्थान जवाबदेही, गुणवत्ता और बेहतर शैक्षणिक मानकों की दिशा में आगे बढ़ती है।अंत में इसका सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचता है।

शैक्षणिक ढांचों के बढ़ने से बढ़ रहे अवसर
वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 8 नए शासकीय महाविद्यालय, 5 नए निजी महाविद्यालय और 3 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं। होने वाला यह विस्तार इस बात का प्रमाण है कि विकसित छत्तीसगढ़ की कल्पना में शिक्षा को मूलभूत प्राथमिकता दी जा रही है। सिर्फ संस्थान खोलकर उसकी संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि वहां पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक भी हों,यह आवश्यक है। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए प्राध्यापकों के 595 पदों के साथ सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ाधिकारी के 700 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है। कहा जा सकता है कि शिक्षा की इमारत के साथ उसके भीतर ज्ञान का दीप जलाने वाले मानव संसाधन को भी मजबूत किया जा रहा है।
गरीब, युवा अन्नदाता और नारी अभी पर है विकास की समान भागीदारी
GYAN मॉडल में युवा ही अकेले नहीं हैं। विकसित राज्य की कुछ अनिवार्य शर्तें हैं जैसे गरीबों को विकास के अवसरों से जोड़ना, किसानों को आधुनिक कृषि और बेहतर आय की दिशा देना और महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना। जब गरीबों के जीवन में स्थायित्व आएगा, किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ेगी, महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी और युवा कुशल बनेंगे तभी विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकता है। इन सभी खूबियों के कारण ही GYAN को उसके संक्षिप्त नाम से नही बल्कि छत्तीसगढ़ के समावेशी विकास के रूप में देखा जा रहा है।

विष्णु भैया की दूरदेशी और 2047 का सपना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक संपदा, युवा शक्ति और सांस्कृतिक विरासत के साथ विकास के नए अवसरों की ओर देख रहा है। अंजोर विजन 2047, इस अनंत संभावनाओं को दीर्घकालिक दिशा देने का प्रयास है।
राज्य के मुखिया का मानना है कि काफ़ी दूर दिखाई देने वाले वर्ष 2047 के विकसित राज्य की नींव आज ही रखनी होगी। आज के स्कूल, कॉलेज, कौशल केंद्र, शोध प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षित युवा ही कल के विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे।
इसलिए विष्णु भैया का विजन है भविष्य की पीढ़ी में निवेश का विजन।

ज्ञान से होगा अंजोर और अंजोर से होगा विकास
छत्तीसगढ़ी संस्कृति में ‘अंजोर’ का मतलब होता है प्रकाश और यही प्रकाश यदि ज्ञान का हो तो वह केवल एक व्यक्ति का जीवन नहीं बल्कि पूरी पीढ़ी का भविष्य रोशन कर सकता है। समग्रता में कहें तो GYAN मॉडल का संदेश है, गरीब को अवसर मिले, युवा को ज्ञान/कौशल मिले, अन्नदाता को सम्मान/ समृद्धि मिले और नारी को मिले आत्मनिर्भरता।
वर्ष 2047 का विकसित छत्तीसगढ़ निर्विवादित रूप से आर्थिक रूप से मज़बूत प्रदेश तो होगा ही साथ ही उसकी पहचान ऐसे राज्य के रूप में भी होगी जहां शिक्षा गुणवत्तापूर्ण हो, युवा आत्मविश्वासी हों, किसान समृद्ध हों, महिलाएं स्वावलंबी हों और गरीब विकास की मुख्यधारा में सम्मान के साथ खड़ा हो।
विष्णु भैया के नेतृत्व में राज्य की विकास यात्रा इसी व्यापक सोच के साथ बढ़ती दिखाई दे रही है। ज्ञान की इस रोशनी से पैदा होंगे अवसर उस अवसर से जन्मेगा आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से तैयार होगा विकास और इससे बनेगी 2047 के विकसित छत्तीसगढ़ की वह तस्वीर जिसकी नींव वर्तमान समय से रखी जा रही है।


