छिंदवाड़ा। जो मेहंदी अमूमन सुहाग, खुशियों और उत्सव का प्रतीक मानी जाती हैं, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में उसी मेहंदी से खुदकुशी की एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान सामने आई है। जिसे सबको सन्न कर दिया है। यहां चौरई क्षेत्र में एक 32 वर्षीय विवाहिता ने अपने हाथ और पैरों पर मेहंदी की डिजाइन बनाने के बजाय पूरा सुसाइड नोट लिख डाला और फिर मौत को गले लगा लिया। खुशियों के रंग से लिखे इस दर्दनाक आखिरी संदेश को देखकर पुलिस भी हैरान है और इसे केस का सबसे बड़ा साक्ष्य मानकर तफ्तीश में जुट गई है।
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मेहंदी की डिजाइन नहीं हाथ-पैरों पर उकेरी जिंदगी की अंतिम पीड़ा
यह मामला चौरई थाना क्षेत्र के ग्राम चन्हियाखुर्द का है। मृतक महिला की पहचान 32 वर्षीय प्रीति वर्मा के रूप में हुई है। प्रीति ने शुक्रवार को जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। लेकिन कदम उठाने से पहले उसने कागज-कलम के बजाय अपनी हथेलियों और पैरों को सुसाइड नोट बनाया। उसने मेहंदी से अपने शरीर पर उन हालातों, दर्द और जिंदगी की उस आखिरी पीड़ा को लिखा, जिसके चलते वह यह कदम उठाने पर मजबूर हुई।
साक्ष्य जुटाने में लगी पुलिस
चौरई टीआई मोहन मर्सकोले ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने साक्ष्यों को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है। महिला के हाथ-पैरों पर रची उस ‘खूनी मेहंदी’ के संदेशों की बाकायदा विशेष फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई है, ताकि कोर्ट और फॉरेंसिक जांच में इसे पुख्ता सबूत के तौर पर पेश किया जा सके।
13 साल का सफर… और मासूम बेटे की मौत का वो ‘गहरा सदमा’
शुरुआती जांच और पारिवारिक पृष्ठभूमि खंगालने पर जो सच सामने आ रहा है, वह बेहद भावुक करने वाला है। प्रीति की शादी करीब 13 साल पहले लखन वर्मा के साथ हुई थी। सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन कुछ समय पहले कुदरत ने इस परिवार पर वज्रपात कर दिया।
कुछ समय पूर्व प्रीति के मासूम बेटे की अचानक मृत्यु हो गई थी। एक मां के सामने उसके कलेजे के टुकड़े का दुनिया से चले जाना प्रीति बर्दाश्त नहीं कर पाई। वह लंबे समय से गहरे मानसिक तनाव और सदमे में जी रही थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी डिप्रेशन के चलते उसने यह खौफनाक रास्ता चुन लिया।
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अस्पताल में तोड़ा दम, पीएम रिपोर्ट का इंतजार
परिजनों को जैसे ही प्रीति की हालत बिगड़ने का पता चला, वे उसे आनन-फानन में गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर भागे। वहां प्राथमिक इलाज के बाद हालत नाजुक होने पर उसे एक निजी अस्पताल रेफर किया गया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उसकी सांसें नहीं बचा सके और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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