मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने दिल्ली सचिवालय में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन'(One Nation, One Election) से जुड़े दो संशोधन विधेयकों का अध्ययन कर रही संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। यह समिति विधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 के विभिन्न प्रावधानों पर राज्यों और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से दिल्ली के दौरे पर आई है। मुख्यमंत्री ने समिति के सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुशासित और प्रशासनिक रूप से दक्ष बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों से सुझाव लेने की यह पहल सराहनीय है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर पूरी गंभीरता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ समिति को अपने विस्तृत सुझाव उपलब्ध कराएगी।
संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला, सांसद विष्णु दयाल राम, भर्तृहरि महताब, डॉ. संबित पात्रा, विष्णुदत्त शर्मा, सुखदेव भगत, जीएम हरीश बालयोगी, के. राधाकृष्णन, घनश्याम तिवारी, कविता पाटीदार और संजय जयसवाल शामिल थे। बैठक के दौरान समिति ने मुख्यमंत्री के साथ Constitution (129th Amendment) Bill, 2024 और Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2024 से जुड़े संवैधानिक, विधिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान लोकसभा और विधानसभा चुनावों के समन्वय, चुनावी चक्र के एकीकरण, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार अधिनियम पर संभावित प्रभाव, प्रशासनिक तैयारियों और अन्य संबंधित विषयों पर विस्तार से मंथन किया गया।
‘एक साथ चुनाव समय की जरूरत’
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ समय की आवश्यकता है। उनके अनुसार लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने से देश के समय, ऊर्जा और संसाधनों की बड़ी बचत होगी। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने के कारण प्रशासनिक तंत्र लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहता है। साथ ही, आदर्श आचार संहिता लागू होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है और सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी जिम्मेदारियों में लग जाता है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से दिल्ली का उल्लेख करते हुए कहा कि राजधानी जैसे छोटे राज्य में चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लगने से शिक्षा व्यवस्था सहित कई सार्वजनिक सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार चुनाव होने से सरकारों का कार्यकाल और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है। उनका मानना है कि राष्ट्रहित में ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे सरकारें बिना अनावश्यक व्यवधान के पूरे कार्यकाल के दौरान विकास और जनकल्याण के कार्यों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें। दिल्ली के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में विधानसभा चुनाव आमतौर पर लोकसभा चुनाव से लगभग एक वर्ष के अंतराल पर होते हैं। यदि राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी समन्वय स्थापित करने के लिए दिल्ली विधानसभा के कार्यकाल में आवश्यक समायोजन करना पड़े, तो दिल्ली सरकार इस पर सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार करने के लिए तैयार है। यदि राष्ट्रहित में इसकी आवश्यकता होती है, तो दिल्ली इस दिशा में सहयोग करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल होने के लिए भी तैयार रहेगी।
‘दिल्ली सरकार लिखित सुझाव भी देगी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली देश का ऐसा महानगर है, जहां लगभग सभी राज्यों के नागरिक निवास करते हैं। ऐसे में चुनावी व्यवहार और मतदान से जुड़े कई विशिष्ट पहलुओं का अध्ययन यहां विशेष महत्व रखता है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति (JPC) द्वारा जिन विषयों पर सुझाव मांगे गए हैं, उन सभी पर दिल्ली सरकार विस्तृत अध्ययन करेगी और अपने लिखित सुझाव भी औपचारिक रूप से समिति को सौंपेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास होगा कि समिति अपनी अंतिम अनुशंसाएं तैयार करते समय दिल्ली की संवैधानिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को भी समुचित रूप से ध्यान में रख सके।
सुशासन को मजबूत करने वाले सुधारों का समर्थन
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ऐसे हर सुधार का समर्थन करती है, जिससे सुशासन, प्रशासनिक दक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हो। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी बदलाव के दौरान संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की पूरी तरह रक्षा होना आवश्यक है। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय पर सकारात्मक सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति सभी संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का व्यापक अध्ययन करने के बाद देशहित में उपयुक्त और संतुलित अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी।
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