केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) को उसकी 27.3 एकड़ जमीन से बेदखल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने एस्टेट ऑफिसर के समक्ष याचिका दायर कर दावा किया है कि संबंधित जमीन केंद्र सरकार की है और क्लब का उस पर कब्जा अनधिकृत है। इसलिए परिसर को खाली कराया जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इस भूमि की आवश्यकता रक्षा अवसंरचना (डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर), सार्वजनिक सुरक्षा और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए है। इसी आधार पर क्लब से जमीन खाली कराने की मांग की गई है। इस मामले में क्लब को तत्काल राहत भी नहीं मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बेदखली की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। ऐसे में अब एस्टेट ऑफिसर के समक्ष आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
केंद्र सरकार ने Land & Development Office (एलएंडडीओ) के एस्टेट ऑफिसर के समक्ष दायर याचिका में कहा है कि दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन भारत सरकार की संपत्ति है। सरकार का तर्क है कि Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act, 1971 के तहत यह एक सरकारी परिसर (पब्लिक प्रिमाइसेस) है, इसलिए इस पर किसी भी तरह का अनधिकृत कब्जा नहीं रह सकता। याचिका में केंद्र सरकार ने बताया है कि यह भूमि वर्ष 1928 में तत्कालीन इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड (जिसे अब दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) को स्थायी लीज पर दी गई थी। सरकार ने लीज डीड की धारा 4 का हवाला देते हुए कहा है कि यदि किसी सरकारी परियोजना के लिए इस जमीन की आवश्यकता होती है, तो सरकार को इसे वापस अपने कब्जे में लेने का अधिकार है।
केंद्र सरकार ने एस्टेट ऑफिसर के समक्ष दायर अपनी याचिका में कहा है कि लीज एग्रीमेंट के क्लॉज 4 के तहत लीज समाप्त होने और सरकार द्वारा संपत्ति पर दोबारा कब्जा लेने के बाद Delhi Gymkhana Club का परिसर में बने रहना कानूनी रूप से अवैध है। सरकार का दावा है कि Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act, 1971 के प्रावधानों के अनुसार क्लब अब अनधिकृत कब्जाधारी (Unauthorized Occupant) की श्रेणी में आता है, इसलिए उसे जमीन से बेदखल किया जाना चाहिए। केंद्र ने अपनी दलील में यह भी कहा है कि यह भूमि राष्ट्रीय राजधानी के अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है। सरकार के अनुसार इस स्थान की आवश्यकता रक्षा अवसंरचना, सुरक्षा संबंधी जरूरतों और अन्य जनहित की परियोजनाओं के लिए है।
22 मई को जारी किया था नोटिस
केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि भारत के राष्ट्रपति की ओर से Land & Development Office (एलएंडडीओ) के माध्यम से 22 मई को एक नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में दिल्ली जिमखाना क्लब की लीज समाप्त करने और संबंधित संपत्ति पर तत्काल प्रभाव से केंद्र सरकार का कब्जा बहाल करने का निर्देश दिया गया था। सरकार के अनुसार क्लब को 5 जून तक परिसर का कब्जा केंद्र सरकार को सौंपने के लिए कहा गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। केंद्र का दावा है कि लीज समाप्त होने के बावजूद दिल्ली जिमखाना क्लब अब भी जमीन पर कब्जा बनाए हुए है, इसलिए उसे Public Premises Act, 1971 के तहत अनधिकृत कब्जाधारी मानते हुए बेदखल किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।
जमीन खाली न करना अवैध कब्जा
केंद्र सरकार ने एस्टेट ऑफिसर के समक्ष दायर याचिका में कहा है कि लीज समाप्त होने के बाद भी परिसर खाली न करना कानून की दृष्टि में अनधिकृत कब्जा है। सरकार का तर्क है कि दिल्ली जिमखाना क्लब का जमीन पर बने रहना Public Premises Act, 1971 के तहत अवैध कब्जे की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने एस्टेट ऑफिसर से क्लब को अनधिकृत कब्जाधारी घोषित करने, उसे कानून के प्रावधानों के तहत बेदखल करने और संबंधित सरकारी संपत्ति को खाली कराकर सरकार को कब्जा सौंपने का आदेश जारी करने की मांग की है।
डिफेंस और सुरक्षा परियोजनाओं के लिए जमीन की जरूरत
केंद्र सरकार की ओर से एस्टेट ऑफिसर के समक्ष दायर ताजा याचिका उस आदेश के बाद दाखिल की गई है, जिसमें Land & Development Office (एलएंडडीओ) के माध्यम से दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक परिसर का कब्जा सरकार को सौंपने के लिए कहा गया था। सरकार का कहना है कि इस भूमि की आवश्यकता रक्षा अवसंरचना, सार्वजनिक सुरक्षा और अन्य जनहित से जुड़ी परियोजनाओं के लिए है। सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली जिमखाना क्लब ने Delhi High Court का रुख किया था। हालांकि, केंद्र सरकार के अनुसार हाईकोर्ट ने बेदखली की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद सरकार ने एस्टेट ऑफिसर से कानून के अनुरूप क्लब को अनधिकृत कब्जाधारी घोषित कर संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने की मांग की है।
देश के सबसे पुराने प्रतिष्ठित क्लबों में शुमार है दिल्ली जिमखाना क्लब
दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना वर्ष 1913 में इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब के रूप में हुई थी। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया। यह देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित क्लबों में गिना जाता है। लुटियंस दिल्ली के प्रमुख इलाके में, प्रधानमंत्री आवास के निकट स्थित इस क्लब की लंबे समय से एक विशिष्ट पहचान रही है। इसके सदस्यों में वरिष्ठ नौकरशाह, सैन्य अधिकारी, राजनयिक और देश के कई प्रमुख कारोबारी नेता शामिल रहे हैं। अपनी ऐतिहासिक विरासत, विशिष्ट सदस्यता और राजधानी के रणनीतिक स्थान के कारण यह क्लब लंबे समय से चर्चा का केंद्र रहा है।
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