प्रमोद निर्मल, मोहला-मानपुर। जिले में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर एक ऐसा प्रशासनिक छलावा सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना प्रशासन के गैरजिम्मेदाराना रवैये के चलते फेल हो गई है। मामला अंबागढ़ चौकी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पिपरखार का है, जहां साल 2022 में मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना अंतर्गत एक विशाल भू-भाग में बड़ी संख्या में पौधों का रोपण किया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव में तमाम पौधे सूख कर मर गए। इसके चलते अब क्षेत्र में प्रशासनित उदासिनता पर सवाल उठने लगे हैं।
पौने 9 लाख रुपए से अधिक की लागत से यहां पौधरोपण समेत क्षेत्र की सुरक्षा घेरा, पानी की व्यवस्था तथा कुछ अन्य निर्माण किए गए थे। पौधारोपण के तीन साल बाद आज इस जगह में लगाए गए पौधे इतने बड़े हो जाते कि आज हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का मार्ग प्रशस्त कर रहे होते, लेकिन विडंबना ही कहें कि प्रशासनिक उदासीनता ने लाखों की लागत और मुख्यमंत्री के पदनाम से जुड़ी योजना का ऐसा बेड़ागर्क कर दिया है कि यहां रोपे गए लगभग तमाम पौधे सूख कर मर गए।


पानी की व्यवस्था चौपट है और हरियाली व पर्यावरण संरक्षण के दंभी दावे कर बसाया गया ये क्षेत्र उजाड़ हो गया है। लाखों की लागत के इस प्रोजेक्ट की कार्य एजेंसी स्थानीय ग्राम पंचायत रही है। प्रोजेक्ट की आज जो दुर्दशा है उसे ग्राम पंचायत के सचिव भी स्वीकार रहे हैं। यही नहीं सचिव ने तो इस वृक्षारोपण कार्य को फेल करार भी दे दिया।

जवाब मांगने पर क्षेत्रीय अधिकारी ने झाड़ा पल्ला
एक ओर लाखों की लागत से लगाए गए पौधे पेड़ बनने से पहले ही जमीदोज हो गए, इससे पर्यावरण संरक्षण भी धरी की धरी रह गई। वहीं दूसरी ओर आमतौर पर हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का ढिंढोरा पीटने वाले वन महकमे के क्षेत्रीय अधिकारी यहां भी अपनी योजनाओं का बखान करने से बाज नहीं आ रहे। हमने उनसे पौधों और पौधरोपण परिसर की दुर्दशा पर उनसे जवाब मांगा तो साहब अपनी योजनाएं गिनाते पल्ला झाड़ गए।
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