नूंह में बाल विवाह के खिलाफ चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में सीजेएम नेहा गुप्ता ने भाग लिया। उन्होंने लोगों से इस सामाजिक कुप्रथा को जड़ से खत्म करने की अपील की।
सोनू वर्मा, नूंह। जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से मिटाने के लिए एम डीडीऑफ इंडिया (शक्ति वाहिनी) की टीम ने एक व्यापक जनजागरूकता हस्ताक्षर अभियान चलाया है। इस मुहिम का उद्देश्य आमजन को बाल विवाह के दुष्प्रभावों और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति सचेत करना है। अभियान के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) एवं सचिव नेहा गुप्ता ने स्वयं हस्ताक्षर कर इस मुहिम को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को बाल विवाह न करने और इसे रोकने का संकल्प दिलाया। सीजेएम नेहा गुप्ता ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का सीधा हनन है, जो उनके शारीरिक स्वास्थ्य, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य पर घातक प्रभाव डालता है।
हस्ताक्षर अभियान से बढ़ा जनसमर्थन
यह हस्ताक्षर अभियान नूंह बस स्टैंड, डालसा के एडीआर सेंटर और शहर के विभिन्न प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित किया गया। इस पहल में बड़ी संख्या में राहगीरों, युवाओं, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और बाल विवाह के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। अभियान के दौरान टीम के सदस्यों ने नागरिकों को जागरूक करते हुए अपील की कि यदि उन्हें अपने आसपास कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो वे बिना डरे प्रशासन या स्थानीय पुलिस को तुरंत सूचित करें। नागरिकों ने बड़ी संख्या में हस्ताक्षर कर बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का दृढ़ संकल्प लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समाज में अब कुरीतियों के प्रति जागरूकता का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।
सामाजिक बदलाव के लिए सक्रिय प्रयास
एम डीडीऑफ इंडिया शक्ति वाहिनी नूंह की टीम ने बताया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का मुख्य ध्येय समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। टीम का मानना है कि बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित करना ही इस कुप्रथा का एकमात्र समाधान है। अभियान को मिला व्यापक जनसमर्थन इस बात का प्रतीक है कि लोग अब बाल विवाह जैसे सामाजिक अभिशाप को सहन करने के लिए तैयार नहीं हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और शक्ति वाहिनी के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे भविष्य में भी जारी रखने की मांग की है, ताकि जिले के हर बच्चे को उसका सुनहरा बचपन और शिक्षा का अधिकार बिना किसी बाधा के प्राप्त हो सके।

