चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बहुत ही अच्छी और बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के सरकारी स्कूलों में इसी नए पढ़ाई के सीजन यानी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विद्यार्थियों को विदेशी भाषा के रूप में फ्रेंच सीखने का शानदार मौका मिलने जा रहा है। शिक्षा विभाग इस योजना पर पिछले 1 साल से काफी मेहनत कर रहा था। अब इस विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम का आखिरी दौर 6 से 10 जुलाई तक गुरुग्राम के राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी परिसर में आयोजित होने जा रहा है। इस अंतिम चरण के पूरा होते ही राज्य के 37 चुने हुए सरकारी शिक्षक अपने-अपने जिलों के स्कूलों में बच्चों को फ्रेंच भाषा पढ़ाना शुरू कर देंगे।

इन 4 जिलों को मिलेंगे सबसे ज्यादा विदेशी भाषा के शिक्षक

शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस योजना के तहत हिसार जिले को सबसे बड़ा फायदा होने जा रहा है। हिसार को सबसे अधिक 6 फ्रेंच भाषा के शिक्षक मिलने वाले हैं। इसके बाद नूंह, रोहतक और सिरसा जिलों का नंबर आता है, जिन्हें 4-4 शिक्षक दिए जाएंगे। माध्यमिक शिक्षा महानिदेशालय ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को एक जरूरी सरकारी पत्र जारी कर दिया है। इस पत्र में सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जिन शिक्षकों का चयन इस काम के लिए हुआ है, वे इस आखिरी पांच दिवसीय ट्रेनिंग कैंप में अपनी उपस्थिति निश्चित रूप से दर्ज कराएं ताकि आगे बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।

दिल्ली और हैदराबाद के एक्सपर्ट्स ने दी 1 साल की खास ट्रेनिंग

सरकारी स्कूलों के इन 37 शिक्षकों को फ्रेंच भाषा सिखाने के लिए पिछले 1 साल से लगातार कड़ी ट्रेनिंग दी जा रही थी। यह ट्रेनिंग अलग-अलग चरणों में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पूरी की गई है। शिक्षकों को भाषा सिखाने के लिए हैदराबाद की मशहूर संस्था एलायंस फ्रांसेज के बड़े विशेषज्ञों ने हर हफ्ते नियमित रूप से ऑनलाइन क्लास लीं। इसके अलावा दिल्ली की एलायंस फ्रांसेज संस्था में ले जाकर इन शिक्षकों को आधुनिक तरीके से पढ़ाने के तौर-तरीके और फ्रांस के रहन-सहन व संस्कृति के बारे में भी विस्तार से समझाया गया है।

बदलेगा सरकारी स्कूलों का माहौल, बच्चों को होगा बड़ा फायदा

अधिकारियों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में फ्रेंच जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषा की शुरुआत होने से बच्चों का आत्मविश्वास बहुत बढ़ेगा। इस 1 साल की लंबी ट्रेनिंग के दौरान शिक्षकों को न सिर्फ व्याकरण और बोलना सिखाया गया है, बल्कि यह भी ट्रेनिंग दी गई है कि वे खेल-खेल में और आधुनिक तरीकों से बच्चों को यह नई भाषा कैसे सिखा सकते हैं। इस ऐतिहासिक कदम के बाद हरियाणा के सरकारी स्कूल भी अब निजी स्कूलों की तरह आधुनिक और वैश्विक स्तर की शिक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं।