अरूणाचल प्रदेश को लेकर चीन का मोह कोई नया नहीं है. वह बार बार अपने बॉर्डर से लगे हमारे इस राज्य अपर टेढ़ी नजर रखता रहा है. अब हाल ही में भारत के स्थानों को फर्जी नाम देने पर भारत के विरोध के बाद चीन ने मंगलवार (14 अप्रैल, 2026) को फिर से आपत्तिजनक बयान दिया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने अरूणाचल को जांगनान बताते हुए दावा किया कि चीन की संप्रभुता के चलते वह नाम बदल सकता है. रविवार (12 अप्रैल, 2026) को भारतीय विदेश मंत्रालय ने अरूणाचल के अलग-अलग हिस्सों का नाम बदलने की हरकत पर चीन को करारा जवाब देते हुए कहा था कि ऐसे झूठे दावे जमीन की हकीकत नहीं बदल सकते हैं. अरूणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा.
चीन द्वारा जारी लिस्ट में अरूणाचल प्रदेश के 23 स्थानों का नाम
चीन ने हाल ही में अरूणाचल प्रदेश के 23 स्थानों का नाम बदलकर लिस्ट जारी की, 10 सालों में यह छठी बार है जब उसने ऐसा किया है. चीन अरूणाचल को जांगनान कहता है. चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में अरूणाचल में छह स्थानों के फर्जी नामों की पहली लिस्ट जारी की, जबकि 15 स्थानों की दूसरी लिस्ट 2021 में जारी की गई, जिसके बाद 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई. चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है.
भारत ने कहा- हकीकत नहीं बदलेगी
भारत ने कहा कि भारतीय क्षेत्र को काल्पनिक नाम देना हकीकत को नहीं बदल सकता, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर असर जरूर पड़ सकता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली भारतीय क्षेत्र के स्थानों को ऐसे नाम देने के चीनी पक्ष के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करती है.
भारत ने पिछले साल मई में और अप्रैल 2024 में अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बदलने पर कड़ा रुख अपनाया था. रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘भारत की भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के चीन के किसी भी शरारती प्रयास को भारत स्पष्ट रूप से खारिज करता है.’ उन्होंने कहा, ‘चीन की कोशिशें और झूठे दावे इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश समेत ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे.
रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन की ऐसी कोशिशें भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने की कवायद से ध्यान भटकाती हैं. उन्होंने कहा, ‘चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं.’ पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद 2020 में भारत और चीन के बीच तनाव काफी बढ़ गया. पिछले डेढ़ सालों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं.
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