सूरत : केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस 2026’ समारोह के दौरान 5वें ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026’ के राष्ट्रीय परिणामों की घोषणा की गई।

10 लाख से अधिक आबादी वाली देश की मेगा सिटीज (कैटेगरी-1) की रैंकिंग में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने 200 में से 198 अंक प्राप्त कर पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, मध्य प्रदेश का इंदौर शहर 197 अंकों के साथ बेहद सूक्ष्म अंतर से दूसरे स्थान पर रहा, जबकि जबलपुर ने 195 अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया।

गुजरात के प्रमुख व्यापारिक केंद्र सूरत महानगर पालिका ने राज्य के भीतर तो अपना वर्चस्व बरकरार रखा है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर शहर को बड़ा झटका लगा है। लगातार पिछले वर्षों (2024 और 2025) में 196 स्कोर के साथ देश के टॉप-3 में शामिल रहने वाला सूरत इस बार 191 अंकों के साथ फिसलकर 5वें स्थान पर पहुंच गया है।

कैटेगरी-1 (10 लाख से अधिक आबादी) टॉप-10 शहरों का प्रदर्शन

रैंकिंगशहरकुल स्कोर (200 में से)
1लखनऊ198
2इंदौर197
3जबलपुर195
4भोपाल / आगरा (संयुक्त)192
5सूरत191
6रायपुर189
7राजकोट / ठाणे / चंडीगढ़ (संयुक्त)187
8अहमदाबाद / विजयवाड़ा (संयुक्त)186
9गाजियाबाद / नवी मुंबई (संयुक्त)184
10नागपुर183.8
15वडोदरा179

सूरत के पिछड़ने के तीन प्रमुख कारण

  1. इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की धूल ($PM_{10}$): शहर में बड़े पैमाने पर चल रहे मेट्रो रेल निर्माण, फ्लाईओवर और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण हवा में निर्माण कार्य से उत्पन्न धूल कणों का स्तर काफी अधिक पाया गया।
  2. वाहनों का बढ़ता दबाव: निजी वाहनों की संख्या में हुई अप्रत्याशित वृद्धि और पीक आवर्स के दौरान शहर के मुख्य मार्गों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से वाहनों से होने वाला उत्सर्जन तेजी से बढ़ा।
  3. औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण में चुनौती: सूरत महानगर पालिका सीमा में संचालित टेक्सटाइल डाइंग-प्रिंटिंग और केमिकल इकाइयों से निकलने वाले धुएं पर 100% नियंत्रण हासिल करने में प्रशासन विफल रहा।

विजेता शहरों की आक्रामक नीतियां और गुजरात के अन्य शहर

शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले लखनऊ, इंदौर और जबलपुर ने वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए आक्रामक और आधुनिक मॉडल अपनाया। इन शहरों ने 1,100 से अधिक इलेक्ट्रिक कचरा वाहनों का संचालन, 97 से अधिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों का उपयोग और 550 किलोमीटर से अधिक एंड-टू-एंड रोड पेविंग का कार्य पूरा किया।

राष्ट्रीय स्तर पर लखनऊ महानगर पालिका को ‘नेशनल क्लीन एयर सिटी’ के रूप में ₹1.50 करोड़ का नकद पुरस्कार मिला, जबकि लखनऊ के वार्ड-70 को देश के सर्वश्रेष्ठ वार्ड के रूप में ₹50 लाख का विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया।

गुजरात के अन्य बड़े शहरों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सौराष्ट्र की औद्योगिक राजधानी राजकोट 187 अंकों के साथ 7वें स्थान पर रही और इसके वार्ड 2 व 5 को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। अहमदाबाद 186 अंकों के साथ 8वें स्थान पर रहा, जिसके थलतेज वार्ड (वार्ड-8) को उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित किया गया। वहीं वडोदरा 179 अंकों के साथ 15वें स्थान पर रहा।

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