कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। देशभर में डीजल-पेट्रोल (ईंधन) की बढ़ती खपत और कीमतें सरकारों के लिए नई चुनौती बनती जा रही हैं। फिलहाल कीमतों में राहत की कोई बड़ी उम्मीद नजर नहीं आ रही। ऐसे में सरकारें अब खर्च कम करने और ईंधन बचत के नए रास्ते तलाश रही हैं। इसी बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini का एक नया फॉर्मूला चर्चा में आ गया है। सवाल यह है कि क्या यह जमीन पर सफल हो पाएगा?
दरअसल, प्रधानमंत्री Narendra Modi पहले ही अपने काफिले को छोटा करने के साथ मंत्रियों, अधिकारियों और आम लोगों से ईंधन की बचत की अपील कर चुके हैं। अब उसी कड़ी में CM सैनी ने भी बड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने अपने काफिले में केवल तीन गाड़ियां रखने की बात कही है, जबकि मंत्रियों को बिना फॉलो गाड़ी चलने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अधिकारियों को अनावश्यक दौरों से बचने और जरूरत पड़ने पर ही फील्ड विजिट करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक कामकाज में भी बदलाव का संकेत दिया है। अधिकारियों को वर्चुअल मीटिंग को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। उनका कहना है कि सरकार के पास डिजिटल संसाधनों की कमी नहीं है, इसलिए हर छोटी-बड़ी बैठक के लिए लंबी दूरी तय करना जरूरी नहीं होना चाहिए। इससे समय के साथ पेट्रोल-डीजल की खपत में भी कमी लाई जा सकती है।
CM सैनी ने स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों, उद्योगों और शहरी निकायों को भी इस अभियान से जोड़ने की बात कही है। उनका मानना है कि केवल सरकारी आदेशों से बदलाव नहीं आता, बल्कि जनभागीदारी ही सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने साफ कहा कि बिजली, पानी और ईंधन की बचत केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का हिस्सा है।
हालांकि बड़ा सवाल अब भी यही है—क्या जनता और सिस्टम इस ‘ईंधन बचत फॉर्मूले’ को गंभीरता से अपनाएंगे, या यह भी अपील तक सीमित रह जाएगा?

