भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय से दो अति-संवेदनशील जांच आयोगों की फाइलें गायब होने के मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी राजेश वर्मा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। भुवनेश्वर के कैपिटल थाना पुलिस द्वारा जारी नोटिस के अनुसार उन्हें 22 जुलाई को सुबह 11 बजे तक थाने में पेश होना था। हालांकि, तय समय बीत जाने के बाद भी वे पुलिस के सामने पेश नहीं हुए।
कमिश्नरेट पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 179 के तहत पूर्व नौकरशाह राजेश वर्मा और पूर्व आईटी सचिव मनोज मिश्रा को समन जारी किया था। पूर्व आईटी सचिव मनोज मिश्रा 18 जुलाई को ही कैपिटल थाने पहुंचकर अपना बयान दर्ज करा चुके हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रहे राजेश वर्मा को 22 जुलाई सुबह 11 बजे तक थाने में उपस्थित होने के लिए कहा गया था। उनके उपस्थित न होने से जांच एजेंसियों का रुख कड़ा हो सकता है।
किन फाइलों के गायब होने पर चल रही है जांच?
राज्य के गृह विभाग की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आपराधिक जांच शुरू की है। मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण फाइलें गायब पाई गई हैं. इनमें 2008 कंधमाल हिंसा और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्याकांड: न्यायमूर्ति ए.एस. नायडू आयोग की जांच रिपोर्ट और 2016 सम (SUM) अस्पताल अग्निकांड: राजस्व संभागीय आयुक्त (RDC) की जांच रिपोर्ट।
इन अति-संवेदनशील सरकारी दस्तावेजों की चोरी, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश की विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस मामला दर्ज कर कार्रवाई कर रही है।
क्या होगा पुलिस का अगला कदम?
राजेश वर्मा के समन की अनदेखी करने के बाद अब पुलिस के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं. पुलिस उन्हें पेशी के लिए दूसरा समन जारी कर सकती है, या फिर कानूनी सलाह लेकर अदालत से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कराने के लिए आवेदन कर सकती है।
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