BJP Office Kota: राजस्थान के कोटा में BJP Office का निर्माण विवादों के घेरे में आ गया है। 80 फीट रोड पर बन रहे इस कार्यालय को रेलवे ने अवैध निर्माण करार दिया है। रेलवे ने कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। इस विवाद ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

क्या है जमीन का असली विवाद?
यह जमीन कोटा के पॉश इलाके में स्थित है। रेलवे का कहना है कि यह जमीन पहले यूआईटी (KDA) को सड़क निर्माण के लिए लीज पर दी गई थी। लीज की शर्तों के अनुसार, इस भूमि पर किसी भी तरह का व्यावसायिक या स्थायी निर्माण प्रतिबंधित है। रेलवे के अनुसार, यहां पार्टी कार्यालय का निर्माण लीज की शर्तों का खुला उल्लंघन है। इसी कारण रेलवे ने इसे अवैध निर्माण बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है।
मंत्री खर्रा का दावा: केडीए ही जमीन का मालिक
राज्य के नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन (UDH) मंत्री Jhabar Singh Kharra ने रेलवे के दावों को सिरे से खारिज किया है। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन पूरी तरह से कोटा विकास प्राधिकरण के स्वामित्व में है। उन्होंने इसे देश का पहला ऐसा मामला बताया है जहां रेलवे अपनी ही दी हुई जमीन पर इस तरह के दावे कर रहा है।
प्रशासन कर रहा है रिकॉर्ड की जांच
विवाद सुलझाने के लिए प्रशासन ने सक्रियता दिखाई है। मंत्री ने बताया कि रेलवे, राजस्व विभाग और केडीए के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय संयुक्त बैठक हो चुकी है। पुराने रिकॉर्ड के आधार पर जमीन का सीमाज्ञान यानी पैमाइश भी करवाई गई है। मंत्री के अनुसार, अब तक उपलब्ध सभी दस्तावेज केडीए के मालिकाना हक की पुष्टि करते हैं।
भविष्य में क्या होगी कार्रवाई?
फिलहाल यह पूरा मामला दस्तावेजों और सीमाज्ञान की रिपोर्ट पर आकर टिक गया है। रेलवे और केडीए दोनों अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई जा सकती है। यदि रिकॉर्ड में केडीए का पक्ष मजबूत रहता है, तो निर्माण कार्य निर्बाध रूप से जारी रहेगा। इसके विपरीत, रेलवे के दावे सही पाए गए तो कानूनी पेंच और गहरा सकता है।
शिलान्यास के बाद चर्चा में आया दफ्तर
हाल ही में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस कार्यालय का शिलान्यास किया था। इसके बाद पंचायती राज और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी भवन का अवलोकन करने पहुंचे थे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इसे एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बना दिया है। यही वजह है कि जमीन पर उठते सवालों ने अब सियासी रंग ले लिया है।
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