दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में कथित 650 करोड़ रुपये के सीपीए (Central Procurement Agency) घोटाले की जांच के बीच अब सरकारी अस्पतालों में जारी होने वाले टेंडरों पर भी सवाल उठने लगे हैं। इसी क्रम में लोकनायक (एलएन) अस्पताल का ₹17.70 करोड़ का सिक्योरिटी मैनपावर टेंडर विवादों में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल पर बिड नंबर GEM/2026/B/7338438 के तहत 2 अप्रैल 2026 को एक वर्ष के लिए सुरक्षा कर्मियों की उपलब्धता हेतु टेंडर जारी किया गया था। इस टेंडर की अनुमानित लागत ₹17,69,86,478 निर्धारित की गई थी।

तकनीकी मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोप

टेंडर प्रक्रिया के दौरान आरोप लगे कि कुछ एजेंसियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से तकनीकी मूल्यांकन में नियमों की अनदेखी की गई। शिकायतों में कहा गया है कि अनुभव प्रमाण-पत्र, वार्षिक कारोबार, पात्रता शर्तों और मैनपावर क्षमता के मूल्यांकन में कथित अनियमितताएं हुईं, जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई।

सरकार ने गठित की उच्च स्तरीय जांच समिति

बढ़ते विवाद के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 17 जून 2026 को एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया। समिति को पूरे टेंडर की तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता पर उठे सवाल

सूत्रों के मुताबिक, सीपीए मामले की जांच के दौरान कई अन्य खरीद और ठेका प्रक्रियाओं में भी संभावित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई है। ऐसे में एलएन अस्पताल का यह मामला स्वास्थ्य विभाग की टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर रहा है।

आगे क्या?

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना है। फिलहाल सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगी कि टेंडर प्रक्रिया में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।

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