अमित पांडेय, सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से विकास के बड़े-बड़े दावों की खोखली सच्चाई उजागर हुई है। सिहावल जनपद के कुसेड़ा गांव में कीचड़ से सने रास्ते ने एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस को उसके घर पहुंचने से रोक दिया। मजबूर परिजनों को रात के अंधेरे में चारपाई का खटोला बनाकर करीब दो किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के विकास के दावों और वादों की हकीकत भी बयां कर रही हैं।
सीधी जिला कहने को सीधा है लेकिन यहां सब उल्टा है। सरकार सड़क, बिजली पानी, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर लगातार बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन कुसेंडा गांव की इस घटना ने योजनाओं पर पलीता लगा दिया है। दरअसल, यहां एक गर्भवती की प्रसव की सूचना मिलते ही एंबुलेंस समय पर गांव पहुंच गई थी, लेकिन बदहाल और कीचड़ से भरे रास्ते के कारण गर्भवती महिला के घर तक नहीं पहुंच सकी। आखिरकार घर की महिलाओं ने ही उसका प्रसव कराया। इसके बाद परिजन चारपाई को खटोला बनाकर जच्चा-बच्चा को करीब दो किलोमीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक लेकर पहुंचे।
दोनों को बहरी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्वस्थ बताई गई है। वहीं दूसरी ओर बारिश में गांव की सड़क में घुटने तक पानी होने से बच्चों का स्कूल और आंगनबाड़ी जाना चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि विकास के दावों के बीच ग्रामीणों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों जूझना पड़ रहा है। ADM व्ही पी पांडेय ने इस मामले पर कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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