अस्पतालों में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद से जुड़े सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। इस मामले में तत्कालीन प्रभारी डॉ. विनोद कुमार रंगा की गिरफ्तारी के बाद अब 2 और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें तत्कालीन DGHS डॉक्टर वत्सला अग्रवाल (Vatsala Agrawal) और डिप्टी कंट्रोलर अकाउंट्स नीरज चोपड़ा (Neeraj chopra) शामिल हैं। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के आदेश के बाद की जा रही है, जिसके तहत CPA के माध्यम से हुई खरीद प्रक्रियाओं की विस्तृत जांच शुरू की गई है। जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। इस मामले की जांच अब भ्रष्टाचार विरोधी शाखा (ACB) कर रही है, जो दोनों अधिकारियों की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया की गहन जांच में जुटी है।

डॉक्टरों को किया निलंबित

अस्पतालों में दवा और मेडिकल उपकरणों की खरीद से जुड़े सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। अब तक इस प्रकरण में तत्कालीन प्रभारी डॉ. विनोद कुमार रंगा और डॉ. वत्सला अग्रवाल को निलंबित किया जा चुका है, जबकि डॉ. विनोद कुमार रंगा को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) द्वारा गिरफ्तार भी किया गया है। मामले में खरीद प्रक्रिया के दौरान कथित गंभीर अनियमितताओं और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच जारी है। इस पूरे प्रकरण को लेकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच का दायरा अब और बढ़ाते हुए तत्कालीन डीजीएचएस डॉक्टर वत्सला अग्रवाल और डिप्टी कंट्रोलर अकाउंट्स नीरज चोपड़ा भी जांच के घेरे में आ गए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की नियमित समीक्षा और निगरानी के आदेश भी जारी किए गए हैं।

CPA खरीद मामले में CM की सख्ती

इस पूरे प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ किया है कि जनता की गाढ़ी कमाई के एक-एक पैसे की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद जांच एजेंसियां अब तत्कालीन डीजीएचएस की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही हैं और उनकी गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। अब तक इस मामले में डॉ. विनोद कुमार रंगा और डॉ. वत्सला अग्रवाल सहित कुल तीन अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। वहीं, डॉ. विनोद कुमार रंगा को पहले ही भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।

क्या है पूरा मामला

दिल्ली सरकार के अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों और अन्य सामग्री की खरीद प्रक्रिया सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के जरिए होती है, जो डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के तहत आती है। इसी सिस्टम से जुड़े मामले में अब तक कई प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाइयां सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार, तत्कालीन डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल के कार्यकाल के दौरान 18 मई को विजिलेंस ने छापेमारी की थी। इसके तीन दिन बाद यानी 21 मई को उन्हें पद से हटा दिया गया।

इस कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) का रुख किया, जहां उनके तबादले पर अंतरिम रोक लगाई गई थी। इसके बाद 1 जून को नया आदेश जारी कर उन्हें GTB अस्पताल ट्रांसफर कर दिया गया। इसी दिन दिल्ली सरकार ने CPA से जुड़े बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव करते हुए 40 कर्मचारियों का ट्रांसफर किया, जिनमें डॉक्टर, पैरामेडिकल और प्रशासनिक स्टाफ शामिल थे। साथ ही 12 मेडिकल ऑफिसरों को CPA में तैनात किया गया। इसके बाद कार्रवाई और तेज हुई 9 जून को डॉ. वत्सला अग्रवाल को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं 18 जून को डॉ. विनोद कुमार रंगा को ACB ने गिरफ्तार कर लिया।

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