राजधानी दिल्ली में पेड़ों से जुड़े अपराध करने वालों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा। लंबे समय तक चलने वाली जांच और कमजोर प्रक्रिया का फायदा उठाकर आरोपी अक्सर कार्रवाई से बच जाते थे, लेकिन अब दिल्ली सरकार ने इस पर रोक लगाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए दिल्ली सरकार ने पेड़ों से जुड़े अपराधों की जांच के लिए नई SOP (Standard Operating Procedure) जारी की है। नई प्रक्रिया के तहत पेड़ों को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामलों की जांच को समय सीमा में पूरा करना होगा। SOP के अनुसार, पेड़ों से जुड़े अपराध की जांच शिकायत मिलने के दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इससे मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
नई SOP में शिकायत दर्ज कराने के तरीकों से लेकर जांच की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। इसमें बताया गया है कि पेड़ों को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामलों की शिकायतें किन-किन माध्यमों से की जा सकेंगी और शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को क्या कार्रवाई करनी होगी। SOP के अनुसार, वन अधिकारियों को जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं। अब वे मामले की जांच के दौरान गवाहों को बुला सकेंगे। यदि कोई गवाह तय समय पर उपस्थित नहीं होता है तो अधिकारी उसकी अनुपस्थिति के बावजूद जांच को आगे बढ़ा सकेंगे।
दिल्ली में पेड़ों से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई को मजबूत करने के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग ने नई SOP जारी की है। यह SOP Delhi Preservation of Trees Act, 1994 के तहत तैयार की गई है। नई SOP में पेड़ों को नुकसान पहुंचाने, अवैध कटाई और अन्य संबंधित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को तेज और प्रभावी बनाने के लिए कई व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके तहत निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 24 घंटे संचालित होने वाले फॉरेस्ट कंट्रोल रूम और डिवीजन कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे।इसके अलावा शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRTs) तैनात की जाएंगी। SOP में मामलों की कानूनी कार्रवाई को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए अलग लीगल सेल और प्रॉसिक्यूशन सेल बनाने का भी प्रावधान किया गया है।
इन तरीकों से दर्ज होगी शिकायत
नई SOP के अनुसार, पेड़ों से जुड़े अपराधों की शिकायत ग्रीन हेल्पलाइन नाम की विशेष वेबसाइट, लिखित आवेदन और सरकारी मोबाइल ऐप के माध्यम से दर्ज कराई जा सकेगी। इससे आम लोगों के लिए शिकायत दर्ज करना आसान होगा और मामलों की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। SOP में प्रावधान किया गया है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित वृक्ष अधिकारी (Tree Officer) को तुरंत FOR (First Offence Report) दर्ज करनी होगी। इसके बाद त्वरित कार्रवाई के लिए मामले की जानकारी रियल टाइम में फॉरेस्ट कंट्रोल रूम, डिवीजन कंट्रोल रूम, बीट अधिकारियों और संबंधित जमीन के मालिकाना हक वाली एजेंसी को भेजनी होगी।
क्विक रिस्पॉन्स टीमों पर होगी जिम्मेदारियां
नई SOP के तहत क्विक रिस्पॉन्स टीमों (QRTs) और वृक्ष अधिकारियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। SOP के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद QRTs की जिम्मेदारी होगी कि वे जल्द से जल्द अपराध वाली जगह पर पहुंचें, मौके पर चल रही अवैध गतिविधियों को रोकें और स्थिति को यथावत बनाए रखें। इसके साथ ही टीमों को मामले से जुड़े सबूत जुटाने का काम भी सौंपा गया है। QRTs के सदस्य मौके की जियो-रेफरेंस्ड फोटो और वीडियो तैयार करेंगे। इसके अलावा संदिग्ध लोगों की जानकारी दर्ज की जाएगी और अपराध में इस्तेमाल किए गए औजारों, उपकरणों और वाहनों का पूरा विवरण भी रिकॉर्ड किया जाएगा।
नई SOP के तहत वृक्ष अधिकारियों को ऐसे मामलों में रोक लगाने के आदेश जारी करने का अधिकार दिया गया है, जहां पेड़ों की अवैध कटाई या उन्हें नुकसान पहुंचाने की आशंका हो। वृक्ष अधिकारी जरूरत पड़ने पर जमीन का मालिकाना हक रखने वाली एजेंसियों और पुलिस को इसकी जानकारी दे सकेंगे। साथ ही अपराध में इस्तेमाल किए गए औजारों, वाहनों और पेड़ों से जुड़ी सामग्री को जब्त करने की कार्रवाई के लिए भी अनुरोध कर सकेंगे। यदि कोई व्यक्ति या संस्था रोक संबंधी आदेशों का उल्लंघन करती है तो ऐसे मामलों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को भेजा जा सकता है।
नई मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, वन अधिकारियों को मामलों की जांच के दौरान CCTV फुटेज, चश्मदीदों के बयान और अन्य जरूरी साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद कथित अपराधियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष लिया जाएगा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत सुनवाई की जाएगी। SOP में यह भी प्रावधान किया गया है कि जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए गवाहों को बुलाया जा सकता है। यदि नोटिस मिलने के बाद भी आरोपी या गवाह पेश नहीं होते हैं, तो उनकी अनुपस्थिति में भी जांच जारी रखी जा सकेगी।
इसके तहत ऐसे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है, जो अपनी पहचान बताने से इनकार करते हैं या जिनके भागने की आशंका होती है। नई SOP के अनुसार, ऐसे संदिग्ध लोगों को पूछताछ और आगे की प्रक्रिया के लिए रेंज ऑफिसर के सामने पेश किया जा सकता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर वन अधिकारी सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालतों में मुकदमा चलाने के लिए मामले तैयार कर सकेंगे। SOP में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमों को लागू कराने के दौरान वन अधिकारी जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता ले सकते हैं। इससे मौके पर कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इसके अलावा वन विभाग के अलग-अलग डिवीजनों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद होने की स्थिति में वन संरक्षक (Conservator of Forests) का निर्णय अंतिम माना जाएगा।
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