बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने गुरुवार, 13 अगस्त 2026 हैदराबाद स्थित नेशनल लॉ कॉलेज (NALSAR) के स्टूडेंट्स के वकील के तौर पर एनरोलमेंट पर रोक लगाने के अपने फैसले से एक कदम पीछे खींच लिया है. इससे पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी स्टेट बार काउंसिल को निर्देश दिया था कि NALSAR से 2026 में कानून की डिग्री हासिल करने वाले किसी भी छात्र को अगले आदेश तक एडवोकेट के तौर पर एनरोल न किया जाए.

यह विवाद यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के कुछ छात्रों की ओर से विरोध जताने के बाद शुरू हुआ था.

जानकारी के अनुसार, BCI ने एनरोलमेंट पर रोक लगाते हुए कहा था कि NALSAR से मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर 19 अगस्त को बार काउंसिल ऑफ इंडिया मामले की समीक्षा करेगी, तब तक 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स के एनरोलमेंट करने पर अगले आदेश तक रोक जारी रहेगी. जिसे अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने लगी रोक वापस ले ली है.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने पहले के आदेश में बदलाव करते हुए कहा कि  कुछ टीचर्स और बाहरी लोगों ने यूनिवर्सिटी में सीजेआई कांत को बुलाए जाने पर विरोध प्रदर्शन को भड़काया था. BCI ने कहा कि उसकी जांच-पड़ताल से पता चला है कि ज़्यादातर छात्र बेकसूर थे और उनका मकसद भारत के मुख्य न्यायाधीश का ‘अपमान’ करने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल होना नहीं था.

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब नालसार के कुछ छात्रों ने CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई. 

BCI ने अपना पिछला आदेश वापस लेते हुए कहा है कि राज्य बार काउंसिल सभी छात्रों का बतौर वकील नामांकन कर सकते हैं. मामले में विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा. बीसीआई ने अपने आदेश में कहा था कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता. 

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