कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद,मौज मस्ती और मोबाइल की दुनिया में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में ग्वालियर के दो भाई अपनी ताकत, हिम्मत और जुनून से हर किसी को हैरान कर रहे हैं। उम्र महज 9 और 17 साल है,लेकिन कारनामे ऐसे कि देखने वाले भी दांतों तले उंगली दबा लें। 

एक तरफ भारी गाड़ी, दूसरी तरफ दो नन्हे बाजू,रस्सी दांतों से बंधी, शरीर पर जोर और फिर जैसे ही ताकत लगाई, भारी वाहन आगे बढ़ने लगा। ये नजारा किसी फिल्म के एक्शन सीन से कम नहीं लेकिन ये कोई फिल्मी स्टंट नहीं, बल्कि ग्वालियर के दो भाइयों की मेहनत और हौसले का प्रदर्शन है।

गुड़ा-गुड़ी का नाका इलाके में रहने वाले सुनील यादव उर्फ ‘बाहुबली’ के परिवार से आते हैं। 9 साल के रुद्र यादव और 17 साल के अंशुमन यादव,सुनील यादव जो कि पुलिस विभाग में आरक्षक है, वह खुद अपनी असाधारण ताकत के लिए शहर में चर्चित हैं। अब तक वह करीब 8 गाड़ियों को दांतों से खींच चुके हैं। हाल ही में आईजी अरविंद सक्सेना के रिटायरमेंट के मौके पर भी सुनील ने दांतों से उनकी कार खींचकर सबको हैरान कर दिया था। अब उसी जुनून और फिटनेस को परिवार के दोनों बच्चे आगे बढ़ा रहे हैं।

रुद्र यादव महज 9 साल की उम्र हैं जो चौथी कक्षा के छात्र हैं लेकिन हौसला किसी चैंपियन से कम नहीं है। रुद्र यादव पिछले करीब 3 महीने से रोजाना अभ्यास कर रहे हैं। खेलने-कूदने की उम्र में रुद्र ने अपनी दिनचर्या में फिटनेस और मेहनत को शामिल किया है। अभी रुद्र एक गाड़ी दांतों से खींच लेते हैं, लेकिन हौसला इससे भी बड़ा है। उनका अगला टारगेट, एक साथ दो गाड़ियां खींचना है। उसका कहना है कि चाचा सुनील यादव को देखकर सीखा है। मुझे भी सबको दिखाना है कि बच्चे कुछ भी कर सकते हैं।

वहीं 17 साल के अंशुमन यादव जो 12वीं कक्षा में पढ़ते हैं वह पिछले करीब एक साल से अपने पिता सुनील यादव के साथ नियमित जिम में पसीना बहा रहे हैं। ताकत चाहिए तो मेहनत करनी होगी, स्टेमिना चाहिए तो अनुशासन जरूरी है और फिट शरीर चाहिए तो रोज पसीना बहाना होगा। इस मंत्र के साथ अंशुमन खूब मेहनत में जुटे है। अंशुमन स्कूल में भी अपनी ताकत का प्रदर्शन कर चुके हैं। स्कूल के एक कार्यक्रम में उन्होंने दांतों से गाड़ी खींचकर शिक्षकों और साथी छात्रों को हैरान कर दिया था।

आरक्षक सुनील यादव कहते हैं कि उन्होंने कभी बच्चों पर ताकत दिखाने का दबाव नहीं बनाया। ये दोनों अपनी इच्छा और मेहनत से फिटनेस की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। उनका मकसद सिर्फ ताकत दिखाना नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं को फिट रहने, मेहनत करने और नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है।

हौसला उम्र नहीं देखता, जुनून शरीर की ताकत से बड़ा होता है। रुद्र और अंशुमन की कहानी सिर्फ गाड़ी खींचने की कहानी नहीं है।ये उन बच्चों के लिए संदेश है जो घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय गुजार देते हैं। ऐसे में उठिए… खेलिए… दौड़िए… कसरत कीजिए…अपने शरीर को मजबूत बनाइए। क्योंकि मजबूत शरीर के साथ मजबूत आत्मविश्वास भी पैदा होता है।

खास बात यह भी है कि अब 15 अगस्त पर इन दोनों छोटे बाहुबलियों का अगला इम्तिहान होगा। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम के मौके पर दोनों सार्वजनिक प्रदर्शन करेंगे लेकिन इस प्रदर्शन का असली संदेश गाड़ियों को खींचना नहीं, बल्कि बच्चों को फिटनेस, अनुशासन, मेहनत और नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना होगा। उनके इस जज्बे के कारण ही लोग अब इन्हें प्यार से ‘छोटा बाहुबली’ कहते हैं। अब 15 अगस्त को जब तिरंगा लहराएगा, तब ये दोनों अपने हौसले और ताकत का कितना बड़ा प्रदर्शन करते हैं। इस पर सभी की नजर रहेगी।

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