Business Desk – Crude Oil Price Rise : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आया है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच सोमवार (20 जुलाई) सुबह ब्रेंट क्रूड 2.63% की तेजी के साथ 90.436 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं WTI क्रूड 2.20% बढ़कर 84.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. तेल की कीमतों में इस तेजी का असर भारत की तेल कंपनियों, शेयर बाजार और आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है.

क्यों बढ़ रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में शामिल है. यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ता है.

भारत पर क्यों पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ जाता है. इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने का खतरा रहता है और अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर सिर्फ तेल कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा. BPCL, IOCL और HPCL जैसी सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में आगे चलकर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ सकती है. ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है. इससे महंगाई बढ़ने की संभावना भी तेज हो जाती है.

आज प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपए और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर है. मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपए और डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है. कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपए और डीजल 99.82 रुपए प्रति लीटर है. चेन्नई में पेट्रोल 109.45 रुपए और डीजल 101.26 रुपए प्रति लीटर है. वहीं गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपए और डीजल 95.64 रुपए, जबकि नोएडा में पेट्रोल 101.96 रुपए और डीजल 95.44 रुपए प्रति लीटर है.

किन सेक्टरों पर पड़ेगा असर?

कच्चे तेल का इस्तेमाल केवल पेट्रोल और डीजल बनाने में ही नहीं होता. टायर, एविएशन, पेंट, केमिकल और लॉजिस्टिक्स जैसे कई उद्योग भी इस पर निर्भर हैं. तेल महंगा होने से इन कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ने और शेयरों में दबाव आने की आशंका रहती है.

शेयर बाजार पर भी बढ़ सकता है दबाव

तेल की कीमतों में तेजी से भारतीय शेयर बाजार पर भी असर पड़ सकता है. खासकर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, एयरलाइन, पेंट और टायर सेक्टर के शेयर दबाव में आ सकते हैं. वहीं महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण निवेशकों की धारणा भी प्रभावित हो सकती है.

विशेषज्ञों की क्या सलाह है?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो भारत का आयात बिल और महंगाई दोनों बढ़ सकते हैं. ऐसी स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है. विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान घबराकर निवेश न बेचें और डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाए रखें.