हेमंत शर्मा, Indore. साइबर ठग समय के साथ खुद को हाईटेक करते जा रहे हैं। अब उन्होंने सरकारी संस्थानों के नाम का सहारा लेकर कारोबारियों और उद्योगपतियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला महू कैंटोनमेंट बोर्ड के नाम पर सामने आया है, जहां ठग फर्जी परचेज ऑर्डर तैयार कर इंदौर और आसपास के उद्योगपतियों को भेज रहे हैं। इन ऑर्डर के जरिए पहले बड़े ऑर्डर का झांसा दिया जाता है और फिर ट्रांसपोर्ट, रजिस्ट्रेशन या अन्य खर्चों के नाम पर एडवांस रकम जमा कराने का दबाव बनाया जाता है।
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क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक महू कैंटोनमेंट बोर्ड के नाम और लेटरहेड का दुरुपयोग कर अलग-अलग कारोबारियों को ई-मेल और व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी परचेज ऑर्डर भेजे जा रहे हैं। ऑर्डर पूरी तरह असली दिखें इसके लिए उनमें विभाग के नाम, अधिकारियों के हस्ताक्षर और अन्य आधिकारिक जानकारियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। कई कारोबारी इन दस्तावेजों को असली समझकर ठगी का शिकार होने की कगार तक पहुंच गए।
सतर्कता से बची 2.15 लाख रुपये की ठगी
हाल ही में एक महिला उद्योगपति के पास भी इसी तरह का परचेज ऑर्डर पहुंचा। शुरुआत में उन्हें ऑर्डर वास्तविक लगा, लेकिन भुगतान से पहले उन्होंने दस्तावेजों की पुष्टि करने का फैसला किया। जब महू कैंटोनमेंट बोर्ड से संपर्क किया गया तो पता चला कि ऐसा कोई ऑर्डर जारी ही नहीं किया गया था। उनकी सतर्कता के कारण करीब 2.15 लाख रुपये की ठगी होने से बच गई।
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रोजाना चार से पांच लोग पहुंच रहे कैंटोनमेंट बोर्ड
महू कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार यह मामला अब लगातार बढ़ता जा रहा है। रोजाना चार से पांच लोग ऐसे फर्जी परचेज ऑर्डर लेकर बोर्ड कार्यालय पहुंच रहे हैं और उनकी सत्यता की जानकारी मांग रहे हैं। इससे साफ है कि साइबर ठग बड़े पैमाने पर कारोबारियों को अपना निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
फर्जी कॉल/लिंक से आगे बढ़े सायबर ठग
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब केवल फर्जी कॉल या लिंक तक सीमित नहीं हैं। वे सरकारी विभागों के नाम से नकली दस्तावेज तैयार कर भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं। फर्जी ई-मेल आईडी, व्हाट्सएप मैसेज, नकली लेटरहेड और डिजिटल हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर ठगी की नई रणनीति अपनाई जा रही है।
कारोबारियों से पुलिस की अपील
पुलिस और साइबर सेल ने कारोबारियों से अपील की है कि किसी भी सरकारी विभाग या संस्था के नाम से मिले परचेज ऑर्डर पर कार्रवाई करने से पहले संबंधित विभाग से उसकी पुष्टि अवश्य करें। बिना सत्यापन के किसी भी खाते में एडवांस राशि जमा न करें और किसी संदिग्ध ई-मेल, लिंक या दस्तावेज पर भरोसा न करें।
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मामले की जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी परचेज ऑर्डर तैयार कर भेजने वाले गिरोह का नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है। शुरुआती जांच में यह मामला सुनियोजित साइबर ठगी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें बड़े कारोबारियों और उद्योगपतियों को निशाना बनाया जा रहा है।
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